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Motivation Story : मौत का डर क्या करता है, जानिए 3 रोचक कहानी

अनिरुद्ध जोशी
कहते हैं कि मौत का डर तो मौत से भी खतरनाक होता है परंतु हर बार नहीं। कई बार डर हमें मार देता है और कई बार डर हमें बचा भी लेता है। यह व्यक्ति के माइंड पर निर्भर करता है कि वह डर को किस तरह से लेता है। कहते हैं कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत। इस संबंध में 3 कहानियां आपको प्रेरित कर सकती है।
 
 
पहली कहानी : कहते हैं कि अमेरिका में एक कैदी को फांसी की सजा दी तो डॉक्टरों ने जजों से कहाकि कैदी पर प्रयोग किया जाए फांसी के बजाए जहर देकर मारा जाए। ऐसा ही आदेश हुआ।...कैदी को बताया गया कि आपको फांसी नहीं कल सांप के जहर से मारने का आदेश हुआ है। रातभर कैदी सांप के जहर के बारे में सोचता रहा।
 
सुबह उसे एक कुर्सी पर बैठाकर उसे एक बड़ा जहरिला सांप दिखाया गया। कैदी उसको देखकर कांप गया। फिर उसके हाथ बांधकर उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई। इसके बाद उसे सांप से ना डसवा कर सेफ्टी पिन जोर से चुभाई गई। आश्चर्य यह हुआ कि उस सुई को चुभाते ही कुछ देर में ही तड़फ तड़प कर उस कैदी की मौत हो गई। इससे भी बड़ा आश्चर्य तब हुआ जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार कैदी के शरीर में सांप का जहर पाया गया। डॉक्टरों की टीम ने पुष्टि की ही इस कैदी की मृत्यु सांप के काटने से हुई है। सभी डॉक्टर्स यह देखकर आश्चर्य करने लगे और तब यह सिद्ध हुआ कि आदमी का डर क्या कर सकता है। डर के कारण उसके शरीर और मस्तिष्क ने उसी जहर का निर्माण कर दिया। मतलब कि उसके शरीर में उसी तरह के हर्मोंस निर्माण हुए। लगभग 90 प्रतिशत रोग सबसे पहले आपके मस्तिष्क में ही जन्म लेते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि आप कोरोना के प्रति लापरवाह बन जाओ।

 
दूसरी कहानी : हिरण के दौड़ने की क्षमता करीब 90 किलोमीटर होती है और बाघ के दौड़ने की क्षमता करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। परंतु फिर भी बाघ हर बार हिरण का शिकार कर लेता है। ऐसा क्यों होता है? दरअसल, हिरण को मौत का डर रहता है और वह सोचता है कि मैं बाघ से जीत नहीं पाऊंगा।


तीसरी कहानी : एक व्यक्ति ने अपने सिद्ध गुरु से पूछा कि गुरुजी आपसे कोई पाप नहीं होता, आपको क्रोध नहीं आता और आप सदा प्रेमपूर्ण और शांत चित्त बने रहते हैं तो इसका राज क्या है? उसके सिद्ध गुरु ने एकदम से व्यवहार बदलते हुए कहा, यह बात तो छोड़ों मैं तुम्हें एक दु:खद सूचना देना चाहता हूं। उसने कहा, क्या गुरुजी। गुरुजी ने कहा कि आज से ठीक तीसरे दिन शाम को तुम्हारी मौत हो जाएगी। यह सुनकर तो उसके पैरों के नीचे से जमीन हिल गई। वह रोने लगा। गुरुजी ने कहा कि अब तुम देख लो तुम्हें क्या करना है। 
 
वह व्यक्ति वहां से चला गया और फिर उसने जिस-जिस का भी दिल दुखाया था उन सभी से माफी मांगी। अपने माता-पिता, भाई-बहन और बेटा-बेटी-पत्नी सभी से प्यार करने लगा। पहले दिन तो उसका यही कार्य चलता रहा, माफी मांगना और लोगों से प्यार से पेश आना। दूसरे दिन उसने गरीब लोगों को खाना बांटा और अपने रिश्तेदारों को बुलाकर उन्हें कई उपहार देकर उन्हें भी तृप्त किया। तीसरे दिन वह शांति से घर पर रहा और ध्यान एवं भजन करता रहा। अब वह खुश था कि चलो मैंने लोगों के लिए तो कुछ किया। अपनी गलतियों को सुधार लिया। 
 
तीसरे दिन शाम को उसके गुरुजी आए और उससे पूछने लगे कि बताओ इन तीन दिनों में तुमने कोई गलत कार्य तो नहीं किया, कोई पाप तो नहीं किया, किसी का दिल तो नहीं दुखाया? 
 
वह कहने लगा- गुरुजी आप कैसी बातें करते हैं, मौत सिर पर खड़ी है तो ऐसे में मैं भला क्या किसी के साथ गलत व्यवहार करूंगा? नहीं गुरुजी! आज तीसरे दिन में बहुत शांत हूं और अब मुझे इस बात का सुकून मिलेगा कि मैंने सभी के लिए कुछ ना कुछ किया और कोई हिसाब-किताब बाकी नहीं रखा। 
 
गुरुजी मुस्कुराकर बोले कि यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। तीन दिन पहले तुमने मुझसे पूछा था कि आपसे कोई पाप नहीं होता, आपको क्रोध नहीं आता और आप सदा प्रेमपूर्ण और शांत चित्त बने रहते हैं तो इसका राज क्या है?...बेटे एक-ना-एक-दिन सभी को मरना ही है लेकिन तुम इसे गहराई से समझते नहीं और मैं समझता हूं कि आज जिसे में देख रहा हूं, सुन रहा हूं एक-ना-एक-दिन वे सभी मुझसे दूर चले जाएंगे। तुम निश्चिंत रहे अभी तुम मरने वाले नहीं हो।

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