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बचपन में पिता हो गए शांत, मां ने की दूसरी शादी, तब हुआ संघर्ष प्रारंभ और फिर इस तरह बने करोड़पति

Webdunia
शुक्रवार, 3 सितम्बर 2021 (12:36 IST)
अमेरिका का एक लड़का जब 5 वर्ष का था तब तक पूरा परिवार सुखी था परंतु अचानक उस लड़के के पिता की मौत हो गई तो मां को नौकरी करना पड़ी। मां नौकरी पर जाती तो वह मासूम-सा लड़का सभी के लिए खाना पकाता था। जब वह 7वीं कक्षा में अया तो उसे पढ़ाई छोड़ाना पड़ी। हालांकि यह भी कहा जाता है कि उसने जैसे-जैसे 16 वर्ष की उम्र तक पढ़ाई की थी। यह उसके लिए दूसरा झटका था। उनके छोटे भाई-बहन भी थे।
 
यह भी कहते हैं कि तीसरा झटका तब लगा जब उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली। यह भी कहा जाता है कि दिन वह घर से भी भाग गया था। वह अपने परिवार को पालने की जिम्मेदारी के चलते ही कभी स्ट्रीटकार कंडक्टर बना, स्टीम बोट में नौकरी की, कभी इंश्योरेंस में सेल्समैन का कार्य किया, तो कभी रेलरोड में फायरमैन का कार्य किया। इस तरह उसका कार्य जैसे-तैसे चलता रहा।
 
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस छोटे से लड़के ने अपनी उम्र 16 वर्ष की बताकर आर्मी भी ज्वाइन कर ली थी। उसने क्यूबा में नौकरी भी की थी। इसके बाद वह 40 वर्ष की उम्र में चिकन बनाकर बेचने लगा। उस समय उनके पास उसका कोई खुद का रेस्टोरेंट नहीं था। चिकन की गुणवत्ता के कारण शीघ्र ही उसकी प्रसिद्धि और बिक्री बढ़ने लगी और वे 142 सीट वाले होटल में मुख्य कुक के रूप में नौकरी करने लगा। उन्होंने चिकन पकाने का नया तरीका Pressure Fryer ईजाद किया। वर्ष 1935 में गवर्नर रूबी लफून (Ruby Laffoon) द्वारा उन्हें Kentucky Colonell की उपाधि दी गई।
 
1009 से ज्यादा प्रयासों के बाद आखिरकार 1952 में उन्होंने पेटे हार्मन (pete harman) नामक व्यक्ति को अपना पार्टनर बनाने के लिए मना लिया। उन्होंने अपनी फ्राइड चिकन की रेसिपी को पेटेंट करा के 1952 में साल्ट लेक सिटी में पहला रेस्टोरेंट खोला।‍ फिर धीरे-धीरे अपने उत्पादकों की एक चेन सारी दुनिया में फैला दी। 
 
अब आप जानना चाहते होंगे कि उस बच्चे का नाम क्या था जो बड़ा होकर करोड़ों रुपए की कंपपनी का मालिक बन गया?
 
दरअसल, उसका नाम है कर्नल साण्डर्स (Colonel Sanders)। जी हां, ये है KFC केंटकी फ्राइड चिकन (Kentucky Fried Chicken) के मालिक। इनका पूरा नाम है हारलैण्ड डेविड सांडर्स (Harland David Sanders)। वर्ष 1964 में कर्नल ने KFC कार्पोरेशन का हिस्सा 2 मिलियन डॉलर्स में बेच दिया। कर्नल ने कनाडा में अपनी फ्रेंचाइजी बेची और उससे अपार धन कमाया। यह मैकडॉनल्ड्स के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रेस्टोरेंट चैन है।
 
उनका जन्म 9 सितम्बर 1890 को हुआ और 16 दिसम्बर 1980 को उनका देहांत होगा।
 
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परिस्थितियां कैसी भी हो व्यक्ति की लगन और उसके कार्य करने की क्वालिटी से वह विश्‍व विजेता बन सकता है। सफलता के लिए यह दोनों ही बातें जरूरी है।

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