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हाथरस केस : आधी रात को सच को जला डाला

स्मृति आदित्य
उत्तरप्रदेश की पुलिस की मुस्तैदी पर हैरान हूं कि आखिर कैसे परिवार की जानकारी के बिना पीड़िता को जला दिया वह भी आधी रात के अंधेरे में.... हाथ नहीं कांपें? अपनी लड़की नहीं दिखी उस मासूम की लाश में... किसे बचाने की कवायद, क्या छुपाने की कोशिश...किसे खुश करने का कुप्रयास... किसने दिया अधिकार, कैसे कर दिया अंतिम संस्कार.... जीने का अधिकार तो छीन लिया पर मृत्यु का सम्मान भी लूट लिया... वाह री बेशर्म व्यवस्था????  
 
कोई फर्क नहीं पड़ता वह वाल्मिकी समाज से थी या वैष्णव... लड़की की कोई जात नहीं होती... उसका बस शरीर होता है। जब मन करे नोंच खसोट लो और जब मन करे जला दो.. हैदराबाद में दरिंदों ने जला दिया यहां दरिंदों को बचाने के लिए पुलिस ने यह नेक काम कर दिया... 
 
इंसान ही हैं न आप, कहां बेच आए अपनी आत्मा को ... एक बार भी नहीं पसीजा अपना कलेजा.. बेटी तो बेटी होती है न.. सांझी और सम्मान की अधिकारी...किसी भी बेटी के सिर पर हाथ रखोगे तो क्या याद आएगी मनीषा? कहीं किसी की बेटी जब अग्नि के फेरे ले रही होगी तो क्या उन लपटों में दिखेगीं ये चिंगारियां जो काली रात में तुमने जलाई थी...
 
जुबान कटी थी या नहीं कटी थी इस पर बहस करने वालों क्या लड़की को जला देने के पीछे भी खोज रहे हो कुतर्क? 
 
 तुमने आधी रात को उसकी लाश नहीं जलाई, भारतीय कन्या के सम्मान को जलाया है, सच को जलाया है, इंसाफ को जलाया है... शर्म और गरिमा को जलाया है... परिवार की मर्यादा को जलाया है भारत की उस सभ्यता को जलाया है जो हर बेटी में अपनी संतान होने की नजर रखती है ... 'जहां हर बालक एक मोहन है और राधा एक एक बाला... ' 
 
हम देख रहे हैं कि एक प्रदेश की गुत्थी को उलझाने में पुलिस का ही हाथ है और आज एक और प्रदेश का सत्य जलाने का काम पुलिस ने कर डाला है... 
 
प्रदेश की सरकार राम मंदिर के लिए जिस तत्परता से जुटी थी क्या वो तत्परता इस मामले में दिखाई देगी? मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को मानने वाले क्या यहां मर्यादा का चीरहरण देख पा रहे हैं? क्या मर्यादा को खाक में मिलाना देख पा रहे हैं? 
 
धू धू करती बिना चिता के जलाई कन्या आज हम सबकी 'मनीषा' पर जलते हुए सवाल खड़े कर रही है? इस देश के तमाम बड़े मुद्दों के सामने आज नारी अस्मिता का मुद्दा सबसे ज्वलंत है...

अस्मिता को छल लिया, जुबान काट कर रख दी, बिना परिवार को बताए जला दिया... अब अगली क्या तैयारी है? 
 
यह नाकाम प्रशासन की लाचार व्यवस्था है जिसपर सिर्फ लानत भेजी जा सकती है, इससे ज्यादा कुछ नहीं.. इससे कम कुछ नहीं...‍

कितनी लाड़ो को कहें हम कि मत आना इस देश में...आओ तो ‍‍बगैर जुबान से आना...वरना गला भी रेत दिया जाएगा और जुबान भी... जब इससे भी मन नहीं भरेगा तो आधी रात को आग के हवाले करने की व्यवस्था(?) भी है... सोच समझ कर जन्म लेना बिटिया...  

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