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मोटापे के खिलाफ पीएम नरेन्द्र मोदी

नवीन जैन
PM Narendra Modi against obesity: यह शुभ संकेत है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम में 23 फरवरी को मोटापे के खिलाफ के कैंपेन शुरू किया है। पिछले कुछ सालों से मोटापा या शरीर का फुटबॉल की तरह फूलना जन-जन की समस्या बन गया है, जिसने डायबिटीज, बीपी, थायराइड, श्वसन संबंधी तकलीफों और यहां तक कि किडनी की समस्याओं को भी खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। अब तो बच्चे भी बच्चे नहीं दिखते बल्कि वो छोटी सी उम्र में तोंदू होने लगे हैं और उनके शरीर पर बेकार की चर्बी की कई परते जमने लगी हैं। अफसोस की बात यह है कि ये बीमारियां हमारी अपनी दी हुई हैं। ये रोग कोई नैसर्गिक नहीं हैं। बदलती जीवन शैली और खानपान में फास्ट या जंक फूड के बढ़ते उपयोग के कारण देश की नई नस्लें खासकर मोटापे से फूल रही हैं। जब कभी इस तरह की समस्याएं समाज में पैदा होती है तो समझाइश ही सबसे कारगर दवा साबित होती है।
 
पीएम नरेंद्र मोदी ने मोटापे के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए एक ओर जहां जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तो दूसरी और उद्योगपति आनंद महिंद्रा को मनोनीत किया है। खास बात यह है कि पीएम ने इन दस हस्तियों से कहा है कि वे भी 10 दस लोगों को मोटापे के खिलाफ कैंपेन चलाने के लिए तैयार करें। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी द्वारा नियमित रूप से पोस्टकार्ड लिखने की प्रक्रिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
 
गांधीजी अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ जिस भी व्यक्ति को पोस्टकार्ड लिखते तो उससे अनुरोध करते कि वो भी अपने कम से कम दो परिचितों को ऐसे ही पोस्टकार्ड लिखें और वे दो लोग अपने अपने दो दो अन्य जान पहचान वाले लोगों को ऐसे ही पोस्टकार्ड लिखें। गांधीजी का एक हाथ जब पोस्टकार्ड लिखते-लिखते थक जाता तो वे दूसरे हाथ से ये काम करने लगते। बापू किसी से भी भेंट में पोस्ट कार्ड ही लेते। जब इस पोस्टकार्ड अभियान ने फिरंगियों की हुकूमत के खिलाफ देश की जनता को खड़ा करने में मदद की तो क्यों न माना जाए कि पीएम मोदी ने जिन लोगों को मोटापे के खिलाफ कैंपेन चलाने के लिए नॉमिनेट किया है वे इस बीमारी पर निर्णायक अंकुश लगाने में सफल होंगे।
 
बता दें कि भारत में कभी इक्के-दुक्के व्यक्ति को ही शुगर या मधुमेह की बीमारी होती थी, लेकिन अब चिंता और दुख की बात ये है कि हमारा देश दुनिया में डायबिटीज कैपिटल के रूप में जाना जाने लगा है, जिससे व्यक्ति की औसत आयु 67 वर्ष में कमी आने का भी खतरा पैदा हो गया है। एक और बात यह है कि जंक फूड और उक्त बीमारियों के चलते विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार पर बेजा कब्जा करना शुरू कर दिया है।
 
यदि पीएम नरेंद्र मोदी के इस अभियान को गंभीरता से लिया गया तो तय है कि देश में स्वास्थ्य को लेकर छोटी-मोटी क्रांति तक आ सकती है। पीएम मोदी ने ये भी आगाह किया है कि खानपान में लोग तेल का कम से कम या जरूरी मात्रा में ही उपयोग करें। बता दें कि भारत में यूं तो मूंगफली, सोयाबीन और घानी का तेल भरपूर मात्रा में उत्पादित होता है, लेकिन इधर के कुछ सालों में बढ़ते चटोरेपन के कारण विदेश से तेल आयात करना पड़ता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है।

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