Dharma Sangrah

महाराज और राजा के बीच खिंचीं तलवारें...

राजबाड़ा 2 रेसीडेंसी

अरविन्द तिवारी
सोमवार, 7 सितम्बर 2020 (13:04 IST)
बात शुरू करते है यहां से : एक वक्त ऐसा था जब दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच सिर्फ लकीरें खिंची हुई थीं, लेकिन अब तो राजनीतिक तलवारें खिंच गई हैं। इसलिए राजा और महाराज दोनों के लिए इस बार के उपचुनाव एक अलग ही किस्म की जंग हैं, जिसमें कोई हारना नहीं चाहता। ग्वालियर-चम्बल की 16 सीट्स पर दिग्विजय सिंह अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं तो इसकी एक वजह अपने किले को बचाने की भी है। राजा के घर राघौगढ़ और राजगढ़ संसदीय क्षेत्र पर संघ की नजर बरसों से है। अब महाराज के भाजपा में आने से ये राह आसान होती दिख रही है। वहीं राजा इस बिसात में लगे हैं कि गुना से आगे सिंधिया की सल्तनत न बढ़ सके।

चली तो शर्मा और सुहास की ही : मध्यप्रदेश भाजपा में पांच महामंत्रियों की नियुक्ति से बहुत से संकेत मिल गए हैं। जैसा कि पहले ही तय था चली‌ वीडी शर्मा और सुहास भगत की ही। शिवराजसिंह चौहान, नरेंद्रसिंह तोमर, उमा भारती, प्रहलाद‌ पटेल भी अपने समर्थकों को इन दोनों के माध्यम से ही उपकृत करवा पाए। जो नाम इन नेताओं ने आगे बढ़ाए थे, उनमें से भी मौका उन्हीं को मिला जिन्हें वीडी और भगत ने अपने लिए मुफीद माना। इसी का फायदा रणवीर सिंह रावत, भगवानदास सबनानी, कविता पाटीदार और हरिशंकर खटीक को मिला। शरदेंदु तिवारी को वीडी शर्मा के कोटे से जगह मिली। संकेत यह भी मिल गया है कि जल्दी ही आकार लेने वाली कार्यकारिणी में 50 साल से अधिक उम्र के नेता अपने लिए ज्यादा संभावनाएं ना देखें।

तनखा को फिलहाल राहत : कांग्रेस हाईकमान को चिट्ठी के मामले के बाद संकट में फंसे सांसद विवेक तनखा भी फिलहाल राहत की सांस ले सकते हैं। बताते हैं चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले जिन 2-4 गिने-चुने नेताओं से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने संवाद बनाया उनमें विवेक तनखा भी हैं। यह भी खबर है कि गांधी परिवार को तनखा की लॉयल्टी पर कोई संदेह नहीं है। विवेक तनखा का कश्मीरी पंडित होना भी उनके पक्ष में जा रहा है। भाई-बहन विवेक तनखा को घाघ नेता ना मानकर सुलझा हुआ नेता मानते हैं। इसलिए भले ही कपिल सिब्बल और गुलाम नबी के कहने से विवेक तनखा ने चिट्ठी पर दस्तखत किए लेकिन उनकी सज्जनता और परिवार के प्रति निष्ठा फिलहाल काम आ रही है।

ताई को समर्थकों की चिंता : सुमित्रा महाजन भले ही नैपथ्य में चली गई हों लेकिन समर्थकों को या अपने से जुड़े लोगों को अहम भूमिका में देखना चाहती हैं। अभी ताई का पहला टारगेट है अपने कट्टर समर्थक अश्विन खरे को मराठी अकादमी का निदेशक बनवाना। खरे पहले भी इस पद पर रह चुके हैं और इस बार फिर यह पद पाना चाहते हैं। सुमित्रा जी की उन्हें पद दिलवाने में रुचि कितनी ज्यादा है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर से खरे की सिफारिश करने के साथ ही उन्होंने अपने निवास सौजन्य भेंट के लिए पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी इस मामले में मदद मांगी है।

निमाड़ से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर : निमाड़ में लगातार टूटते विधायकों के बीच कांग्रेस के लिए अच्छी खबर ये है कि खरगोन से विधायक रवि जोशी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी नहीं छोड़ने वाले। अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वी अरुण यादव की लगातार कमजोर होती स्थिति के बाद जोशी अब निमाड़ में ज्यादा सक्रिय होकर अपने जनाधार को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो निमाड़ की नर्मदा पट्टी में कांग्रेस को एक मजबूत ब्राह्मण नेता मिल सकता है। जोशी को एआईसीसी से जुड़े कुछ दिग्गजों से भी प्रोत्साहन मिला है। सीडब्ल्यूसी की बैठक को लेकर कथित तौर पर घर के भेदी की भूमिका निभाने के बाद वैसे भी अरुण यादव के सितारे गर्दिश में हैं।

क्या होगा विवेक जौहरी का? : वीके सिंह के स्थान पर जब विवेक जौहरी को मध्यप्रदेश के डीजी की कमान सौंपी गई थी तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह सुनिश्चित किया था कि जौहरी हर हालत में 2 साल डीजीपी रहेंगे। इसके लिए बाकायदा आदेश जारी हुए। संभवतः इसी कारण जौहरी बीएसएफ के डीजी जैसा अहम पद छोड़कर मध्यप्रदेश आने को तैयार हुए थे। अब कमलनाथ मुख्यमंत्री हैं नहीं और जौहरी की सेवानिवृत्ति 30 सितंबर को है। तब के आदेश का अब क्या होगा इसको लेकर बड़ी उत्सुकता है क्योंकि यदि सेवानिवृत्ति के बाद भी जौहरी पुराने आदेश के क्रम में डीजीपी पद पर बरकरार रहते हैं तो फिर संजय चौधरी और संजय राणा सहित आधा दर्जन अफसर स्पेशल डीजी पद से ही रिटायर हो जाएंगे। वैसे अपने काम और वर्तमान निजाम से अच्छे संबंधों के कारण जौहरी तो बेफिक्र हैं।

वीरा राणा को मिल सकती है अहम भूमिका : जब राकेश साहनी मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव थे और इकबाल सिंह बैस मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तब वीरा राणा सामान्य प्रशासन विभाग का सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन यानी आईएएस अफसरों की पदस्थापना देखती थीं। साहनी तो सेवानिवृत्ति के बाद भी अहम भूमिका में रहे। बैस पिछले 15 साल में ज्यादातर मौकों पर बहुत अहम भूमिका में रहे और अब प्रदेश की नौकरशाही में उनके बिना पत्ता भी नहीं खड़कता है। सबको इंतजार अब वीरा राणा के अहम भूमिका में आने का है। वैसे बहुत अच्छे प्रशासनिक करियर को देखते हुए उन्हें कुछ साल बाद प्रदेश के मुख्य सचिव की भूमिका में भी देखा जा सकता है।

मिस मैनेजमेंट का शिकार रापुसे अधिकारी : एक जमाना था जब राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी 7 से 9 साल में आईपीएस हो जाते थे। अब स्थिति बिलकुल उलट है। 1995 बैच के अधिकारी इस साल आईपीएस होंगे और बचे हुए 5-6 अगले साल। इस बैच की आईपीएस में पदोन्नति का सिलसिला 4 साल पहले शुरू हुआ था। दरअसल, यह कैडर मिस मैनेजमेंट का शिकार हो रहा है और इसकी शुरुआत 5 साल पहले हुई थी। अभी रापुसे से भापुसे में पदोन्नति 25 साल में हो रही है और ऐसा ही रहा तो एसपीएस के कई अधिकारी एडिशनल एसपी स्तर से ही रिटायर हो जाएंगे। इसे दो ही तरीके से सुधारा जा सकता है। पहला यह कि राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति का कोटा 33 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाए और दूसरा डायरेक्ट आईपीएस के जो 50 पद पद खाली पड़े हैं, वे राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को दे दिए जाएं।

ध्रुपद संस्थान की परंपरा पर आघात : ध्रुपद संगीत के मामले में विश्व में भोपाल का एक अलग स्थान है। पहले डागर बंधुओं और अब गुंदेचा बंधुओं ने इसे एक अलग पहचान दी। लेकिन गुंदेचा बंधुओं में से एक अखिलेश की लीलाओं के कारण इस ऐतिहासिक परंपरा पर उंगली भी उठ रही है। गुरुकुल की शक्ल में विकसित इनके ध्रुपद संस्थान में विश्व के कई देशों से संगीत सीखने आईं छात्राओं ने कदाचरण के जिस तरह के गंभीर आरोप अखिलेश पर लगाए हैं, वह गुरुकुल परंपरा पर भरोसा करने वालों के लिए एक बड़ा आघात है। हालांकि बड़े भाई उमाकांत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संस्थान की जांच समिति की रिपोर्ट आने तक अखिलेश को कामकाज से दूर कर दिया है। वैसे मामला गंभीर है और इसका नुकसान गुंदेचा बंधुओं को उठाना पड़ सकता है।

चलते चलते : ग्वालियर, जबलपुर, रतलाम, होशंगाबाद और बालाघाट सहित मध्यप्रदेश की 6 रेंज में डीआईजी के पद खाली पड़े हैं और पुलिस मुख्यालय में 8 डीआईजी के पास कोई काम नहीं है। वैसे ग्वालियर में जल्दी ही मिथिलेश शुक्ला डीआईजी के रूप में दिख सकते हैं।

राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा और राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति के लिए डीपीसी अब 10 सितंबर को हो जाएगी। इसमें भी फायदे में राप्रसे के अधिकारी ही हैं। पुलिस में जहां 95 बैच के डीएसपी आईपीएस होंगे, वहीं राप्रसे में 98 बैच के कुछ अफसर भी आईएएस हो जाएंगे इनमें मुख्यमंत्री के उप सचिव नीरज वशिष्ठ भी शामिल हैं।

पुछल्ला : परिवहन महकमे के अंदर के ज्ञान गणित से अब मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी अनभिज्ञ नहीं रहेंगे। इस विभाग के सबसे सशक्त किरदार सत्य प्रकाश शर्मा की काट के लिए परिवहन मंत्री ने हाल ही में अपर परिवहन आयुक्त के निजी सहायक पद से रिटायर हुए नीलकंठ खर्चे को अपने निजी स्टाफ में ले लिया है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

सर्दियों में सेहत और स्वाद का खजाना है मक्के की राब, पीने से मिलते हैं ये फायदे, जानें रेसिपी

सर्दियों में रोजाना पिएं ये इम्यूनिटी बूस्टर चाय, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

Winter Superfood: सर्दी का सुपरफूड: सरसों का साग और मक्के की रोटी, जानें 7 सेहत के फायदे

Kids Winter Care: सर्दी में कैसे रखें छोटे बच्चों का खयाल, जानें विंटर हेल्थ टिप्स

सभी देखें

नवीनतम

Paramahansa Yogananda: परमहंस योगानंद कौन थे?

Cold weather Tips: ठंड में रखें सेहत का ध्यान, आजमाएं ये 5 नुस्‍खे

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

Louis Braille Jayanti: लुई ब्रेल दिवस क्यों मनाया जाता है?

पहचान से उत्तरदायित्व तक : हिन्दू समाज और भारत का भविष्य- मोहन भागवत

अगला लेख