Hanuman Chalisa

राष्ट्रपति ने ज्योतिषियों से पूछकर प्रधानमंत्री को शपथ का समय दिया

Webdunia
-शुभम शर्मा
 
शंकरदयाल शर्मा एक ऐसी शख्सियत हैं, जो राजनीति में आए नहीं लाए गए थे। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में वीआईपी रोड पर एक बड़ी सी मूर्ति मुख्य मार्ग पर थी। बचपन से वह मूर्ति दिखा करती थी। कई प्रश्न जहन में थे कि शहर की सबसे बड़ी मूर्ति किसकी है। उनके एक हाथ में किताब को देखकर यह जरूर समझ में आता था कि वे मां सरस्वती के उपासक रहे होंगे।
 
धीरे-धीरे समझ विकसित हुई तो पता चला कि यह मूर्ति भारत के नौवें राष्ट्रपति रहे डॉ. शंकरदयाल शर्मा की है। मध्यप्रदेश की धरा से निकला एकमात्र व्यक्ति जिन्होंने भारत के सबसे बड़े पद को धारण किया।
 
भोपाल के गुलिया दाई के मोहल्ले में 19 अगस्त 1918 को जन्मे शंकर नवाब भोपाल के वजीफे पर कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़े और फिर वहां छात्रों को पढ़ाया भी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय का इतिहास 700 वर्ष पुराना है, जब राष्ट्रपति शर्मा को वहां से मानद डॉक्टरेट मिली तो उनके साथ-साथ पूरे देश की ख्याति बढ़ी थी।
 
जब वे मध्यप्रदेश के शिक्षामंत्री बने तो उन्होंने स्कूलों में 'ग' से 'गणेश' की जगह 'ग' से 'गधा' पढ़ाना प्रारंभ करवाया। पर अचरच तब हुआ, जब ऐसे सेकुलर नेता का नाम राष्ट्रपति पद के लिए 1992 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने उठाया तो पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने यह कहकर उनका विरोध किया कि वे ब्राह्मण है।
 
जब 1996 के आम चुनाव में देश की जनता ने खंडित जनादेश दिया तो शर्मा ही वे व्यक्ति थे जिन्होंने भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, साथ में ज्योतिषियों से पूछकर शपथ ग्रहण का टाइम भी सुनिश्चित किया। 
 
कितनी सौभाग्यशाली घड़ी थी वो, जब मध्यप्रदेश के भोपाल में जन्मे राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने उसी प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। वाजपेयी सिर्फ 13 दिन सरकार में रहे, पर शंकरदयाल शर्मा के आदर्श एक दल और एक वर्ग से बढ़कर थे। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बनने के लिए सीहोर जिले के अधीन आने वाली छोटी सी रियासत भोपाल के पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने का लंबा सफर तय करके आए थे। जिस नवाब के वजीफे पर उन्होंने उच्च शिक्षा ली, उसी नवाब की जेल में भी वे ठूंसे गए। वे इलाहाबाद में प्रोफेसर थे और अपने गृह जिले आए हुए थे। उनके पिता खुशीदयाल शर्मा वहां सुप्रसिद्ध वैद्य और नामचीन हस्ती थे।
 
भारत आजाद हो चुका था, पर भोपाल का अभी भी नवाब हमीदुल्ला की हठधर्मिता के कारण भारत में विलय नहीं हुआ था। डॉक्टर साहब से मिलने नवाब के विरुद्ध आंदोलन चला रहे लोग आए और सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति होने के नाते आंदोलन का नेतृत्व करने की विनती की। डॉक्टर साहब ने विनती मान ली और जुलूस के रूप में नजदीकी चौक तक पहुंचे ही थे कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। यहां से क्रांतिकारी कदम जो उनके जीवन में जारी हुआ तो वह सीधे राष्ट्रपति की कुर्सी पर जाकर खत्म हुआ।
 
आज भोपाल में उनके पिताजी पं. खुशीदयाल शर्मा के नाम पर और पुत्री गीतांजलि माकन के नाम पर आयुर्वेदिक एवं महिला कॉलेज स्थापित है। वे बचपन में उच्च शिक्षा का फिर पढ़ाते-पढ़ाते कुलपति तक का ख्वाब देखते थे, वे देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। वे उपराष्ट्रपति थे तथा राज्यसभा में उनके दल कांग्रेस के सांसदों की संख्या सर्वाधिक थी। इंदिरा गांधी की मौत के बाद देश के साथ-साथ राज्यों में भी कांग्रेस की बंपर सीटें आई थीं।
 
राज्यों से प्रतिनिधि जब राज्यसभा पहुंचे तो संसदीय आचरण को वे भुला दे रहे थे। शर्माजी पदेन सभापति थे। उन्होंने अपने सांसदों को शिष्टाचार का पाठ भी पढ़ाया और लोकतंत्र के पतन पर उनकी आंखें नम भी हुईं। यह ही डॉक्टर शर्मा का उदार और विराट व्यक्तित्व था। वे कड़ाई से बात मनवाना भी जानते थे और नैतिक मूल्यों को बचाना भी।
 
जब राजीव गांधी की मौत हुई, तो सोनिया गांधी ने उनका नाम कांग्रेसी बुजुर्ग नेताओं से सलाह-मशविरा कर प्रधानमंत्री पद के लिए तय किया, पर वे अपनी अधिक आयु का हवाला देकर प्रधानमंत्री पद से मनाही कर बैठे। यह अलग बात है कि उन्होंने उसके बाद राष्ट्रपति का पद स्वीकारा। पर उनकी नैतिकता उनके जीवन में एक ऐसी मिसाल है, जो बौद्धिक जमात और राजनीतिक तबके के लिए प्रात:स्मरणीय है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मी में बेहतरीन स्वादिष्‍ट आम रस कैसे बनाएं, पढ़ें स्टेप बाय स्टेप विधि और खास कुकिंग टिप्स

B. R. Ambedkar Essay: बाबासाहेब अंबेडकर पर हिन्दी में आदर्श निबंध

मधुमेह रोगियों को नारियल पानी कब पीना चाहिए?

तपती गर्मी से राहत देगा आम का पन्ना, नोट करें विधि

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

सभी देखें

नवीनतम

9 अप्रैल, विश्व नवकार महामंत्र दिवस: जानें कल्याणकारी मंत्र और उसकी विशेष खासियतें

10 Health benefits of Sattu: सत्तू के सेवन से सेहत को मिलेंगे ये 10 फायदे

जब डुमरियागंज संसदीय सीट पर जब्त हुई मोहसिना की जमानत

अमेरिका का आर्तेमिस 2 चंद्र मिशन, जब पृथ्‍वी पीछे छूटती जा रही थी

इंदौर के महेश गनोकर पहुंचे अमेरिका के चुनावी मैदान में, जानें पूरी कहानी

अगला लेख