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मोदी ने दिलाया गरीबों व ग्रामीणों को संसाधनों पर पहला हक : जेटली

Webdunia
शुक्रवार, 13 जुलाई 2018 (17:59 IST)
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने भारत के फ्रांस को पछाड़कर विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुक्रवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने पांरपरिक सोच को बदलकर सुनिश्चित किया कि ग्रामीण भारत एवं गरीब तबकों का संसाधनों पर पहला हक हो।
 
 
जेटली ने विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत को मिली इस उपलब्धि की सराहना की और कहा कि मोदी सरकार कांग्रेस के 1970 एवं 1980 के मॉडल को नहीं अपनाएगी, जो केवल लोक-लुभावन थे। प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक सोच को बदला है और सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण भारत एवं वंचित समुदायों को संसाधनों पर पहला हक मिले।
 
उन्होंने कहा कि यदि अगले दशक में ऐसा जारी रहा और व्यय बढ़ा तो भारत के गांवों में रहने वाले गरीबों पर बहुत जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। यह लाभ सभी को मिलेगा चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। कांग्रेस ने देश के गरीबों को नारे दिए और मोदी ने उन्हें संसाधन दिए।
 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1970 और 1980 के दशकों में लोक-लुभावन नारे दिए जबकि गरीबों के कल्याण के लिए न तो पुख्ता नीति बनाई और न ही पर्याप्त धन का आवंटन किया। उन्होंने मोदी को शब्दों से अधिक काम करने वाला प्रधानमंत्री करार दिया और कहा कि सरकारी नीतियों के कठोरता से क्रियान्वयन से ही मुश्किल लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिली।
 
उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि तेजी से प्रगति करती अर्थव्यवस्था के बहुत सारे फायदे हैं। अधिक उपभोग, अधिक उत्पादन, अधिक उद्योग, बढ़ता सेवा क्षेत्र, व्यापक शहरीकरण, बढ़ते रोजगार के अवसर, अधिक आर्थिक गतिविधि और उसके फलस्वरूप अधिक राजस्व।
 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रदर्शन को लेकर सरकार के अपने मानदंड भी काफी कठोर हो गए हैं। कितनी जल्दी हम अपने लोगों के गरीबी के स्तर को कम करने में कामयाब होंगे, यह एक बड़ी चुनौती हो गई है। हम किस प्रकार से तेज प्रगति के लाभ को ग्रामीण भारत में स्थानांतरित करें जिसे अब तक सबसे कम फायदा मिलता रहा है। बीते 4 साल में सरकार ने एक 'नव मध्य वर्ग' तैयार करने का प्रयास किया ताकि उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके। लेकिन इसके लिए कांग्रेस की तरह लोक-लुभावन तरीके नहीं अपनाए जाएंगे। (वार्ता)

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