Publish Date: Fri, 09 Jan 2026 (17:14 IST)
Updated Date: Fri, 09 Jan 2026 (17:23 IST)
US Tariff Bill : अमेरिकी कांग्रेस में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले प्रस्तावित बिल को लेकर मोदी सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस बिल के बारे में पूरी तरह अवगत है और विकासक्रमों पर करीब से नजर रख रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल को हरी झंडी दे दी है, जिसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमें प्रस्तावित बिल के बारे में पता है। हम डेवलपमेंट्स को करीब से फॉलो कर रहे हैं। उन्होंने एनर्जी सोर्सिंग के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए जोड़ा, एनर्जी सोर्सिंग के बड़े सवाल पर हमारी राय सबको पता है। इस कोशिश में हम ग्लोबल मार्केट के बदलते डायनामिक्स और हमारे 1.4 बिलियन लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स से सस्ती एनर्जी पाने की जरूरत से गाइडेड हैं।
यह बिल मुख्य रूप से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले देशों को लक्षित करता है, जिसका उद्देश्य मॉस्को की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि ट्रंप ने इस द्विदलीय बिल को समर्थन दिया है, जो अमेरिका को ऐसे देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत, जो रूस से बड़ी मात्रा में डिस्काउंटेड तेल आयात कर रहा है, इस बिल से प्रभावित हो सकता है। 2025 में भारत-रूस तेल व्यापार 60 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
सरकार के बयान के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि ट्रंप के साथ 'हग डिप्लोमेसी' का कोई फायदा नहीं हुआ और भारत-अमेरिका संबंधों में 'नई असामान्यता' आ गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद मोदी सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। वहीं अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने दावा किया कि पीएम मोदी ने ट्रंप से बात नहीं की, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल कानून बनता है, तो भारत-अमेरिका के 120 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर असर पड़ सकता है। भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है, लेकिन रूसी तेल की कम कीमत ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति वैश्विक बाजार की गतिशीलता और जनता की जरूरतों पर आधारित है। यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों में नई चुनौतियां पेश कर सकता है।
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