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राहुल गांधी 'Temple Run’ से जीतना चाहते हैं मप्र का 'रण'

आकांक्षा दुबे
मध्यप्रदेश में आगामी चुनाव से ठीक एक पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मंदिर राजनीति का दौर फिर शुरू हो गया। सोमवार को राहुल ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना की। चुनावी दौर में राहुल मध्यप्रदेश में कभी राम तो कभी शिवजी की शरण में जा रहे हैं। तो कभी एक ही दिन में ग्वालियर के गुरुद्वारे और मस्जिद में सजदा करने पहुंच रहे हैं।
 
राहुल की मंदिरों की यात्रा को ‘Temple Run’ गेम का नाम भी दे दिया गया है। भाजपा हर बार राहुल गांधी पर ‘हिन्दुत्व कार्ड’ खेलने के लिए मंदिर दौरों पर सवाल उठाती रही है। बीते एक वर्ष में देश के कई राज्यों में चुनाव हुए। इनमें प्रचार के दौरान राहुल ने सबसे ज्यादा मंदिरों का दौरा किया।
 
बता दें कि 2017 गुजरात चुनाव में तो कांग्रेस ने राहुल को शिवभक्त करार दे दिया था। कांग्रेस का मानना है कि मध्यप्रदेश के आधा दर्जन से अधिक मंदिरों का राज्य की 50 फीसदी सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में 230 में से 109 सीटों पर 8 प्रमुख धर्मस्थलों का प्रभाव है। शायद यही कारण है कि कभी अमित शाह तो कभी राहुल गांधी धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकने पहुंच जाते हैं। राहुल से पहले जुलाई में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी महाकाल मंदिर में दर्शन किए थे।
 
मध्यप्रदेश में यहां दर्शन कर चुके हैं राहुल
कामतानाथ मंदिर, चित्रकूट, सतना जिला
पीतांबरा पीठ, दतिया
जबलपुर के गौरी घाट पर मां नर्मदा की पूजा-अर्चना की
गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़, ग्वालियर
मोती मस्जिद, ग्वालियर
महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
बड़ा गणपति मंदिर, इंदौर
 
इसलिए विवादों में घिरा राहुल का ‘Temple Run’
गुजरात में 2017 में हुए चुनाव में राहुल ने 26 मंदिरों की यात्रा की, लेकिन एक भी मस्जिद में नहीं गए।
गुजरात में राहुल गांधी ने जाति समुदायों पर आधारित मंदिरों की यात्रा की जैसे उन्होंने कभी आदिवासी समुदाय की देवी का अंबाजी मंदिर तो कभी पटेल समुदाय से जुड़े अक्षरधाम मंदिर में दर्शन किए।
उप्र चुनाव में राहुल गांधी मंदिरों में जाने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं दिखे। कारण था मुस्लिम आबादी। मंदिर दौरों से मुस्लिम मतदाता नाराज हो सकते थे। कहा जा रहा है कि राहुल ने 2019 चुनाव के लिए ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का फॉर्मूला अपना लिया है।
 
भगवान शिव पर सिर्फ भाजपा नेताओं का अधिकार है क्या?
राहुल शिवभक्त के तौर पर मंदिर आएंगे। क्या भगवान शिव पर सिर्फ भाजपा नेताओं का अधिकार है क्या? भगवान शिव सभी के लिए हैं। - संजय कपूर, कांग्रेस सचिव
  
कांग्रेस भाजपा पर धर्म पर आधारित राजनीति करने का आरोप लगाती रही है। अब राहुल को ही जवाब देना चाहिए कि वे आखिर चुनाव के पहले मंदिर क्यों जा रहे हैं? - प्रभात झा, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
 
मंदिर दर्शन करना गांधी परिवार की परंपरा : राहुल गांधी की मंदिर यात्राओं को लेकर कांग्रेस ने बचाव में कहा कि मध्यप्रदेश के मंदिरों का दर्शन करना गांधी परिवार की परंपरा है। राहुल गांधी से पहले उनकी दादी इंदिरा गांधी ने तीन बार और राहुल के पिता राजीव गांधी ने एक बार दतिया में पीतांबरा पीठ के दर्शन किए थे। गौरतलब है कि इंदिरा गांधी ने 1979 में उज्जैन आई थीं और भस्मारती में हिस्सा लिया था। वहीं, राजीव गांधी ने 1989 में महाकाल मंदिर में दर्शन किए थे। जिसके बाद 2008 में सोनिया गांधी ने भी यह पूजन किया था।
 
इन प्रमुख धर्मस्थलों का भी किया दौरा, एक नज़र
चामुंडेश्वरी मंदिर, कर्नाटक
हुल्लीगेमा मंदिर, बेल्लारी
ख्वाजा बड़े नवाज़, गुलबर्गा
रोसारियो चर्च और उलाल दरगाह, मंगलौर
कैलाश मानसरोवर
स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

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