Hanuman Chalisa

कविता : पुरवैया से बातें...

पुष्पा परजिया
नील गगन तले निहार समंदर
मन की बांछें खिल-खिल गईं
दूर गगन में पंछी संग बन पांखी
मैं तो उड़ती चली गई।
 
उड़ती ऊंचे आकाश से देखूं
धरती को और मन ही मन ये
सोचते चली गई।
 
आजादी इतनी प्यारी क्यूं कहलाती
और मन को भाती क्यूं है
खुले आकाश के बीच खुली हवा में
ना कोई बंधन ना कोई क्रंदन
 
बयार बहती ठंडी-ठंडी-सी कानों में
कुछ कहती सी गई
देख ये है जहां मेरा यहां,
कभी ना मैं दूषित हुई
 
तेरी धरती ने तो मुझको भी करके काला
मेरा भी है रूप बदल डाला
मैं गर्म और बावली हुई
 
इधर है सुन्दरता और स्वच्छता जो है सदा से जीवन मेरा
कूड़े-करकट के ढेर लगे हैं
मानवता अब धरती से गई स्वार्थ से भर सब
संगी-साथी तेरे वहां नहीं है
 
अपना कोई देख जरा इस गगन पथ को मैं और
पंछी मिल गुनगुनाते हैं
हर कोई इस नभ से मेरी सुन्दरता से तेरी
पृथ्वी भी निहाल हुई
 
सुन-सुन बातें तेरी पुरवैया मैं तेरी
दीवानी हो गई।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव

बाल कविता: टप्पा टप्पा टुन टुन

Ganga Dussehra Bhog: गंगा दशहरा पर मैया को अर्पित करें ये विशेष भोग

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

अगला लेख