प्रवासी कविता हिन्दी में : बसंत बहार आने को है

रेखा भाटिया
घास की सख्ती जाती सिमटती
आई नमी अब वातावरण में
नन्ही ओंस की बूंदें धूप में
चांदनी-सी चमके-दमके।
 
उनके भीतर झांकूं करीब से
हरी कोमल कोंपल छिपी बैठीं
ठंड की धीमी विदाई संग 
माघ की बावली नर्म धूप हुई आतुर।
 
हल्की-सी ठिठुरन यहां
हल्का-सा सुकून वहां
शिशिर अब बिछड़ा फिजाओं से
बादल लुप्त, नील शुद्धता हुई दृष्टिगोचर।
 
गहराइयों से नभ की चले पक्षी झुंड
प्रकृति के किसी कोने में दुबकी लजाती
नवेली-मुस्कराती इठलाती बसंत
स्वागत की प्रतीक्षा में क्षण-क्षण व्याकुल।
 
आओ बसंत बहार का स्वागत कर लें
खिल उठेंगे हजारों गुलाब बगिया में
हरियाली छाएगी चारों दिशाओं में
रंग-बिरंगी तितलियां मंडराएंगी सब ओर।
 
चमकेगा सूरज प्रकृति की बांहों में बांहें डाल
सजेगा वसुंधरा का आंगन बसंत के आगमन से
कैसे रहेगा फिर कोई मन उदास
आओ बसंत बहार आने को है!

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

शरीर में दिखने लगे हैं ये लक्षण, तो तुरंत सावधान हो जाएं, समय से पहले पहचान लें थायरॉइड

मन को शांत और फोकस करने का अनोखा तरीका है कलर वॉक, जानिए कमाल के फायदे

क्या है वजन घटाने नया फ़ॉर्मूला 5:2 डाइट? जानिए इसके फायदे

होली का रंग नहीं पड़ेगा स्किन पर भारी, यह घरेलू नुस्खा है सबसे असरदार

बालों की ग्रोथ के लिए एलोवेरा जेल में ये सफेद चीज मिला कर तैयार करें हेअर मास्क

सभी देखें

नवीनतम

दुनिया को दिखा दो अपने जुनून का दम इन शानदार एटीट्यूड स्टेटस के जरिए

कानून की दलीलें देने वालों को खाकी का गिरेबां पकड़ने में शर्म क्‍यों नहीं आई?

कहीं आप तो नहीं खा रहे मिलावटी आटे की रोटी? जानिए कैसे करें आटे में मिलावट की जांच

कितनी है 8 महीने से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स की सैलेरी

सतरंगी रंगों की लिए बरसात, है आई रंग पंचमी की सौगात... इन संदेशों से भेजें देव होली की शुभकामनाएं

अगला लेख