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Bhanu Saptami 2026: क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी, जानें महत्व, पूजा विधि और व्रत के लाभ

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हमें फॉलो करें रथ पर सवार सूर्य देव का सुंदर फोटो

WD Feature Desk

, शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026 (12:14 IST)
Bhanu Saptami: भानु सप्तमी हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो सप्तमी तिथि आती हैं, जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन है और सप्तमी उनकी प्रिय तिथि, इसलिए यह दिन 'सूर्य ग्रहण' के समान ही प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है। 2026 में भानु सप्तमी रविवार, 8 फरवरी को मनाई जाएगी।ALSO READ: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब रहेगा, भारत में सूतककाल का समय क्या है?
 
  1. भानु सप्तमी का महत्व (Significance)
  2. भानु सप्तमी पूजा विधि (Puja Vidhi)
  3. व्रत के लाभ (Benefits of Fasting)
  4. क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी? (पौराणिक कथा)
  5. आज के लिए विशेष मंत्र
 

भानु सप्तमी का महत्व (Significance)

आरोग्य की प्राप्ति: शास्त्रों में कहा गया है— 'आरोग्यं भास्करादिच्छेत्' अर्थात् अच्छे स्वास्थ्य की कामना सूर्य देव से करनी चाहिए। भानु सप्तमी का व्रत करने से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
 
पितृ दोष से मुक्ति: इस दिन तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
 
मान-सम्मान: सूर्य सफलता और तेज का कारक है। इस दिन पूजा करने से समाज में यश और पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है।
 

भानु सप्तमी पूजा विधि (Puja Vidhi)

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
 
सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करें।
 
आदित्य हृदय स्तोत्र: अर्घ्य के बाद वहीं खड़े होकर 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें। यह शत्रुओं पर विजय और आत्मविश्वास के लिए अचूक है।
 
दीपदान और भोग: सूर्य देव के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ या लाल फल अर्पित करें।
 
उपवास: इस दिन बिना नमक का भोजन करने या केवल फलाहार करने का विशेष महत्व है।ALSO READ: मंगल 2027 तक नरेंद्र मोदी को देगा मजबूती, इसके बाद इस नेता का होगा उदय
 

व्रत के लाभ (Benefits of Fasting)

मानसिक शांति: यह व्रत मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता है।
 
त्वचा रोगों से मुक्ति: धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से सूर्य पूजा करने पर चर्म रोगों में लाभ होता है।
 
सौभाग्य में वृद्धि: महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य और संतान सुख देने वाला माना गया है।
 
स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए भानु सप्तमी का व्रत और सूर्य ध्यान बुद्धि को प्रखर बनाता है।
 

क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी? (पौराणिक कथा)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन ही सूर्य देव पहली बार अपने रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में प्रकट हुए थे। उन्होंने इसी दिन अपने सात घोड़ों के रथ से संसार को आलोकित (प्रकाशित) किया था। इसीलिए इसे सूर्य देव के जन्म उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
 

आज के लिए विशेष मंत्र

एहि सूर्य! सहस्त्रांशो! तेजो राशे! जगत्पते!
अनुकम्प्यं मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर!
-अर्थ- हे सहस्त्रांशो! हे तेजो राशे! हे जगत्पते! मुझ पर अनुकंपा करें। मेरे द्वारा श्रद्धा-भक्तिपूर्वक दिए गए इस अर्घ्य को स्वीकार कीजिए, आपको बारंबार शीश नवाता हूं।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Yashoda Jayanti 2026: कब है यशोदा जयंती 6 या 7 फरवरी, जानें सही डेट, मुहूर्त, पूजा विधि और कथा
 

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