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दशा माता व्रत कब और क्यों किया जाता है? जानें महत्व, पूजा विधि और कथा

WD Feature Desk
बुधवार, 11 मार्च 2026 (16:24 IST)
How to do Dasha Mata Vrat: दशा माता व्रत हिंदू धर्म में विशेष रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।  दशा माता व्रत आस्था, विश्वास और परिवार की खुशहाली से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत है। यह व्रत जीवन की कठिन परिस्थितियों को दूर करने और सुख-समृद्धि प्राप्त करने की कामना से किया जाता है।ALSO READ: साल में 2 बार क्यों आता है खरमास? जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का रहस्य
 
मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार समस्याएं, आर्थिक परेशानी या अशुभ घटनाएं होने लगती हैं, तो उसे 'दशा खराब होना' कहा जाता है। ऐसी स्थिति में दशा माता की पूजा और व्रत करने से जीवन की नकारात्मक दशा समाप्त होकर सुख-शांति और समृद्धि आती है। वर्ष 2026 में दशा माता व्रत या दशा माता की पूजा 13 मार्च 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। प्रतिवर्ष यह व्रत चैत्र कृष्ण दशमी तिथि पर रखा जाता है। इस बार दशमी तिथि 13 मार्च सुबह 6:28 बजे से शुरू होकर 14 मार्च सुबह 8:10 बजे तक रहेगी।
 
 
यह व्रत श्रद्धा, नियम और संयम के साथ किया जाता है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है, जो इस व्रत के महत्व को और अधिक बढ़ाती है। आइये जानते हैं दशा माता व्रत के बारे में...
 

दशा माता व्रत कब किया जाता है?

दशा माता का व्रत सामान्यतः होली के बाद आने वाली चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है। कुछ स्थानों पर महिलाएं इस दिन से 10 दिनों तक विशेष पूजा और नियम का पालन करती हैं। इस दौरान घर में दशा माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके रोज पूजा की जाती है।
 

दशा माता व्रत का महत्व

दशा माता व्रत का हिंदू परंपरा में विशेष महत्व माना गया है। क्योंकि यह व्रत घर की नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए किया जाता है। इस व्रत से परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। जीवन में चल रही कठिनाइयों और आर्थिक संकट को दूर करने में भी इस व्रत को लाभकारी माना जाता है। संतान और पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए भी महिलाएं यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से दशा माता की पूजा करने से जीवन की खराब दशा समाप्त होकर शुभ समय की शुरुआत होती है।
 

दशा माता व्रत की पूजा विधि

दशा माता व्रत की पूजा सरल तरीके से की जाती है।
 
1. दशा माता व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
 
2. घर के पूजा स्थान को साफ करके वहां दशा माता का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
 
3. पूजा में रोली, चावल, फूल, दीपक, नारियल और प्रसाद अर्पित करें।
 
4. कुछ स्थानों पर पीपल के पेड़ के नीचे भी दशा माता की पूजा की जाती है।
 
5. महिलाएं कच्चे सूत के 10 धागे लेकर पूजा करती हैं और दशा माता से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
 
6. पूजा के बाद दशा माता की कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक माना जाता है।
 
7. अंत में आरती करके प्रसाद बांटा जाता है।
 

दशा माता व्रत कथा (संक्षेप में)

 
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी बहुत धार्मिक और श्रद्धालु थी। वह हर साल दशा माता का व्रत करती थी। एक बार व्यापारी ने इस व्रत का मजाक उड़ाया और पूजा को महत्व नहीं दिया। इसके बाद धीरे-धीरे उसके व्यापार में नुकसान होने लगा और परिवार की स्थिति खराब हो गई।
 
तब व्यापारी की पत्नी ने फिर से पूरी श्रद्धा से दशा माता का व्रत और पूजा की। माता की कृपा से कुछ समय बाद उनके घर की दशा फिर से सुधर गई और व्यापार में तरक्की होने लगी। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा और विश्वास से किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
 
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