Biodata Maker

Dhumavati Jayanti 2020 : धूमावती जयंती पर कैसे करें पूजन, जानिए मंत्र एवं स्तुति

Webdunia
Dhumavati Jyanati 2020
 
30 मई 2020, को धूमावती जयंती मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस विशेष अवसर पर दस महाविद्या का पूजन किया जाता है। इस दिन धूमावती देवी के स्तोत्र का पाठ, सामूहिक जप अनुष्ठान आदि किया जाता है। 
 
इस दिन विशेषकर काले तिल को काले वस्त्र में बांधकर मां धूमावती को चढ़ाने से भक्त/साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां धूमावती के दर्शन से संतान और पति की रक्षा होती है। मां भक्तों के सभी कष्टों को मुक्त कर देने वाली देवी है। परंपरा है कि इस दिन सुहागिनें मां धूमावती का पूजन नहीं करती हैं, बल्कि केवल दूर से ही मां के दर्शन करती हैं।
 
मां का स्वरूप : - 
 
मां पार्वती का धूमावती स्वरूप अत्यंत उग्र है। 
 
मां धूमावती विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं। 
 
मां धूमावती का वाहन कौवा है। 
 
श्वेत वस्त्र धारण कर खुले केश रूप में होती हैं।  
 
कैसे करें मां का पूजन :- 
 
मां धूमावती दस महाविद्याओं में अंतिम विद्या है। विशेष कर गुप्त नवरात्रि में इनकी पूजा होती है। 
 
धूमावती जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करके जल, पुष्प, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप तथा नैवैद्य आदि से मां का पूजन करना चाहिए। 
 
इस दिन मां धूमावती की कथा का श्रवण करना चाहिए। 
 
पूजा के पश्चात अपनी मनोकमना पूर्ण करने के लिए मां से प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि मां धूमावती की कृपा से मनुष्‍य के समस्त पापों का नाश होता है तथा दुःख, दारिद्रय आदि दूर होकर मनोवांछित फल प्राप्त होता है। 
 
इन मंत्रों का करें जाप :- 
 
मंत्र :- रुद्राक्ष माला से 108 बार, 21 या 51 माला का इन मंत्रों का जाप करें। 
 
*  ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट् || 
 
*  धूं धूं धूमावती ठः ठः 
 
मां धूमावती का तांत्रोक्त मंत्र 
 
* धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे |
सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि: ||
 
इस दिन मां की विशेष कृपा पाने के लिए उपरोक्त मंत्रों का जाप करना चाहिए। 
 
इस दिन मंत्रों के साथ धूमावती देवी की यह स्तुति पाठ करने से मां की अमोघ कृपा प्राप्त होती है। घर का दारिद्र्य दूर होता है तथा मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। 
 
स्तुति :- 
 
विवर्णा चंचला कृष्णा दीर्घा च मलिनाम्बरा,
विमुक्त कुंतला रूक्षा विधवा विरलद्विजा,
काकध्वजरथारूढा विलम्बित पयोधरा,
सूर्पहस्तातिरुक्षाक्षी धृतहस्ता वरान्विता,
प्रवृद्वघोणा तु भृशं कुटिला कुटिलेक्षणा,
क्षुत्पिपासार्दिता नित्यं भयदा काल्हास्पदा।

ALSO READ: मां धूमावती प्रकटोत्सव : धूमावती माता कौन हैं, जानिए साधना और मंत्र

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

सूर्य का मकर राशि में गोचर, 12 राशियों का राशिफल, किसे होगा लाभ और किसे नुकसान

2026 में इन 4 राशियों का होगा पूरी तरह कायाकल्प, क्या आप तैयार हैं?

शाकंभरी माता की आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Shakambari mata ki aarti

Basant Panchami 2026: वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का त्योहार कब मनाए जाएगा

क्या सच में फिर से होने वाला है ऑपरेशन सिंदूर प्रारंभ, क्या कहती है भविष्यवाणी

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (17 जनवरी, 2026)

शनिवार को भूलकर भी न करें ये 5 काम, 12 अचूक उपाय आजमाएंगे तो खुल जाएगी किस्मत: shaniwar ke upay

17 January Birthday: आपको 17 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 17 जनवरी 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

बसंत पंचमी पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, शुभ कार्यों के लिए है अबूझ मुहूर्त

अगला लेख