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Mahesh Navami 2026: महेश नवमी क्यों मनाई जाती है, क्या करते हैं इस दिन, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
सोमवार, 22 जून 2026 (10:01 IST)
Mahesh Jayanti 2026: हिंदू पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी या महेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पावन पर्व देवों के देव महादेव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित है। साथ ही, यह दिन माहेश्वरी समाज के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उत्सव है। साल 2026 में महेश नवमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इससे संबंधित जानकारी नीचे दी गई है:ALSO READ: Weekly Horoscope 22–26 June 2026: 22 से 28 जून तक कैसा रहेगा आपका सप्ताह? शॉर्ट में पढ़ें साप्ताहिक राशिफल
 

क्यों मनाई जाती है: 

महेश नवमी का पर्व विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने माहेश्वरी समाज को अपना आशीर्वाद प्रदान किया था, अत: इसी दिन माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के आशीर्वाद से हुई थी। इसलिए इसे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

महेश नवमी के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है तथा समाज की समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है। भगवान शिव को 'महेश' यानी करुणा और संहार का देवता माना जाता है। इस दिन महादेव की पूजा करने से जीवन के सभी दुःख, दरिद्रता और गृह-क्लेश हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।
 

क्या करते हैं इस दिन:

महेश नवमी के दिन सुबह जल्दी स्नान के बाद शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी (पंचामृत) से अभिषेक करें। 
 
भगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन और भस्म आदि उनकी प्रिय चीजें अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।
 
'ॐ नमः शिवाय' या 'जय महेश' महामंत्र का 108 बार जाप करें।
 
माहेश्वरी समाज द्वारा इस दिन भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और जगह-जगह महाप्रसाद का वितरण होता है।
 

महेश नवमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त: 

साल 2026 में महेश नवमी 23 जून, मंगलवार को मनाई जाएगी।
 
हिंदू पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि के घटने-बढ़ने का समय इस प्रकार रहेगा:
 
नवमी तिथि की शुरुआत: 22 जून 2026 को दोपहर 03:39 बजे से
नवमी तिथि की समाप्ति: 23 जून 2026 को शाम 04:39 बजे तक
 
पूजा का श्रेष्ठ समय (प्रदोष/प्रातःकाल): चूंकि उदय तिथि 23 जून को मिल रही है, इसलिए भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक 23 जून को सुबह के समय करना बेहद शुभ फलदायी रहेगा।
 
मूल संदेश: महेश नवमी हमें सिखाती है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी अगर हम महादेव की शरण में जाते हैं, तो हमारा कल्याण निश्चित है। त्याग और संतोष ही शिवत्व का असली आधार है।

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