suvichar

सत्यनारायण की कथा क्यों की जाती है, जानिए व्रत पूजा, महत्व और मंत्र

WD Feature Desk
शुक्रवार, 28 मई 2021 (14:30 IST)
स्कंद पुराण के रेवाखंड में भगवान श्री सत्यनारायण की कथा का उल्लेख किया गया है। यह कथा सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण करने वाली, अनेक दृष्टि से अपनी उपयोगिता सिद्ध करती है। यह कथा समाज के सभी वर्गों को सत्यव्रत की शिक्षा देती है। भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा आस्थावान हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए जानी-मानी कथा है। संपूर्ण भारत में इस कथा के प्रेमी अनगिनत संख्या में हैं, जो इस कथा और व्रत का नियमित पालन व पारायण करते हैं। श्री सत्यनारायण व्रत गुरुवार को भी किया जाता है। 

महत्व- सत्य को ईश्वर मानकर, निष्ठा के साथ समाज के किसी भी वर्ग का व्यक्ति यदि इस व्रत व कथा का श्रवण करता है, तो उसे इससे निश्चित ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि सत्यनारायण कथा कराने से हजारों साल तक किए गए यज्ञ के बराबर फल मिलता है। साथ ही सत्यनारायण कथा सुनने को भी सौभाग्य की बात माना गया है। आमतौर पर देखा जाता है किसी भी शुभ काम से पहले या मनोकामनाएं पूरी होने पर सत्यनारायण व्रत की कथा सुनी जाती है। 

श्री सत्यनारायण की व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, चिरकाल में एक बार जब भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में विश्राम कर रहे थे। उसी समय नारद जी वहां पधारे। नारद जी को देख भगवान श्री हरि विष्णु बोले- हे महर्षि आपके आने का प्रयोजन क्या है? 

तब नारद जी बोले- नारायण नारायण प्रभु! आप तो पालनहार हैं। सर्वज्ञाता हैं। प्रभु-मुझे ऐसी कोई सरल और छोटा-सा उपाय बताएं, जिसे करने से पृथ्वीवासियों का कल्याण हो। इस पर भगवान श्री हरि विष्णु बोले- हे देवर्षि! जो व्यक्ति सांसारिक सुखों को भोगना चाहता है और मरणोपरांत परलोक जाना चाहता है। उसे सत्यनारायण पूजा अवश्य करनी चाहिए। 

विष्णु जी द्वारा बताए गए व्रत का वृत्तांत व्यास मुनि जी द्वारा स्कंद पुराण में वर्णन करना। नैमिषारण्य तीर्थ में सुखदेव मुनि जी द्वारा ऋषियों को इस व्रत के बारे में बताना। सुखदेव मुनि जी ने कहा और इस सत्यनारायण कथा के व्रत में आगे जिन लोगों ने व्रत किया जैसे बूढ़ा लकड़हारा, धनवान सेठ, ग्वाला और लीलावती कलावती की कहानी इत्यादि और आज यही एक सत्यनारायण कथा का भाग बन चुका है। यही है सत्यनारायण कथा का उद्गम नारद जी और विष्णु जी का संवाद।

व्रत-पूजन कैसे करें- 

इसके बाद नारद जी ने भगवान श्रीहरि विष्णु से व्रत विधि बताने का अनुरोध किया। तब भगवान श्रीहरि विष्णु जी बोले- 

सत्यनारायण व्रत करने के लिए व्यक्ति को दिन भर उपवास रखना चाहिए। 

श्री सत्यनारायण व्रत पूजनकर्ता को स्नान करके कोरे अथवा धुले हुए शुद्ध वस्त्र पहनें।

माथे पर तिलक लगाएं और शुभ मुहूर्त में पूजन शुरू करें।

इस हेतु शुभ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके सत्यनारायण भगवान का पूजन करें। 

इसके पश्चात्‌ सत्यनारायण व्रत कथा का वाचन अथवा श्रवण करें।

संध्याकाल में किसी प्रकांड पंडित को बुलाकर सत्य नारायण की कथा श्रवण करवाना चाहिए। 

भगवान को भोग में चरणामृत, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि अर्पित करें। इससे सत्यनारायण देव प्रसन्न होते हैं। 

सत्यनारायण व्रत पूर्णिमा के दिन करने का विशेष महत्व है, क्योंकि पूर्णिमा सत्यनारायण का प्रिय दिन है, इस दिन चंद्रमा पूर्ण कलाओं के साथ उदित होता है और पूर्ण चंद्र को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में पूर्णता आती है। 
पूर्णिमा के चंद्रमा को जल से अर्घ्य देना चाहिए। 

घर का वातावरण शुद्ध करके चौकी पर कलश रखकर भगवान श्री विष्णु की मूर्ति या सत्यनारायण की फोटो रख कर पूजन करें।


परिवारजनों को एकत्रित करके भजन, कीर्तन, नृत्य गान आदि करें। सबके साथ प्रसाद ग्रहण करें, तदोपरांत चंद्रमा को अर्घ्य दें। यही सत्यनारायण भगवान की कृपा पाने का मृत्यु लोक में सरल उपाय है।

मंत्र- 'ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः' का 108 बार जाप करें।

आरके.

 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

ग्रहों के बदलाव से 19 मार्च के बाद 5 राशियों का जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा

गुरु होंगे मार्गी: 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, 13 दिसंबर तक मिलेगा बड़ा लाभ

Gudi padwa 2026: गुड़ी पड़वा कब है, क्या महत्व है इसका?

क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है? ग्रह गोचर से मिल रहे चौंकाने वाले संकेत

कुंभ राशि में अंगारक और ग्रहण योग के कारण 4 राशियों को 2 अप्रैल तक रहना होगा सावधान

सभी देखें

धर्म संसार

10 March Birthday: आपको 10 मार्च, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 10 मार्च 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

10 को शीतला सप्तमी 11 को शीतला अष्टमी रहेगी, जानिए कब क्या करें

चैत्र नवरात्रि 2026: कौनसी तिथि किस दिन? घटस्थापना से पारण तक पूरा शेड्यूल

सूर्य का मीन राशि में गोचर: 12 राशियों में किसे मिलेगा लाभ और किसे रहना होगा सावधान

अगला लेख