Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कब है गोपा पंचमी, जानिए इस दिन का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

Advertiesment
When is Bhadrapada Panchami Festival
Gopa Panchami: हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 'गोपा पंचमी' जिसे कुछ स्थानों पर 'भाई-भिन्ना' या 'गोगा पंचमी' भी कहा जाता है, यह पर्व भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है, जिसे विशेष तौर पर गोगा देव और नागदेवता के रूप में पूजा जाता है। इस वर्ष गोपा पंचमी की तिथि 13 अगस्त 2025, दिन बुधवार को पड़ रही है। आइए यहां जानते हैं इस पर्व के मुहूर्त और अन्य जानकारी...ALSO READ: 16 अगस्त को होगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानें क्यों और कैसे मनाएं?
 
13 अगस्त 2025, बुधवार : गोगा/गोपा पंचमी और भाई-भिन्ना पर्व के शुभ मुहूर्त-  
 
भाद्रपद कृष्ण पंचमी का आरम्भ: 13 अगस्त को सुबह 06:35 मिनट से
पंचमी का समापन- 14 अगस्त को अंत 04:23 ए एम पर।
 
ब्रह्म मुहूर्त-04:50 ए एम से 05:34 ए एम 
प्रातः सन्ध्या-05:12 ए एम से 06:19 ए एम
अभिजित मुहूर्त- नहीं है
विजय मुहूर्त- 02:51 पी एम से 03:42 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 07:07 पी एम से 07:30 पी एम
सायाह्न सन्ध्या-07:07 पी एम से 08:15 पी एम
निशिथ मुहूर्त- 14 अगस्त 12:21 ए एम से 01:06 ए एम तक। 
 
महत्व : गोगा/गोपा पंचमी और भाई-भिन्ना पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। कई स्थानों पर इसे भाई भिन्ना व्रत भी कहा जाता है तथा इस दिन विशेष तौर पर गोगा देव यानी जाहरवीर गोगाजी की पूजा की जाती है। इस दिन बहनें खास तौर अपने भाइयों की लंबी आयु और उनकी सुरक्षा के लिए पूजन तथा उपहार की परंपरा भी निभाती हैं। 

जनमानस में प्रचलित मान्यता के अनुसार इस दिन गोगा देव और नाग देवता की पूजा विशेष तौर पर की जाती है। यह व्रत नि:संतान महिलाओं की सूनी गोद जल्द ही संतान सुख से भर देते हैं। यह व्रत पति और संतान को लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य देने वाला माना जा‍ता है, तथा गोगा पंचमी के दिन बहन अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर उन्‍हें मिठाई खिलाकर स्‍वयं चना और चावल का बना हुआ बासी भोजन ग्रहण करती है, जो कि ए‍क दिन पहले ही बनाया होता है। फिर भाई अपने बहनों को क्षमतानुसार रुपए या गिफ्ट भेंट स्वरूप देते हैं।
 
गोगा पंचमी पूजा विधि-
* गोपा/गोगा पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्‍नान करके साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनें।
* इसके बाद सूर्य भगवान को जल से अर्घ्य दें और पीपल व तुलसी में जल चढ़ाएं।
* अब दीवार को साफ-सुथरी करके गेरू से पुताई करें। 
* अब कच्चे दूध में कोयला मिलाकर पुती दीवार पर चौकोर नुमा आकृति बना दें।
* उसके ऊपर गेरू, रोली तथा कोयला मिक्स करके 5 सर्प या सांप बनाएं।
* उसके बाद सर्प की जो आकृतियां आपने बनाई है, उस पर कच्चे दूध, पानी से अभिषेक करें और रोली व चावल अर्पित करें। 
* फिर बाजरा, आटा, घी और शकर मिलाकर प्रसाद चढ़ाएं। 
* पूजन के बाद मंत्र- 'ॐ नम: शिवाय' का जाप जरूर करें। कम से कम एक माला जाप करें। 
* ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें। 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: कब है गोगा नवमी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Aaj Ka Rashifal: 13 अगस्त 2025, सपनों को साकार करने का दिन, पढ़ें 12 राशियों के लिए आज का दैनिक राशिफल