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रामनाथ कोविंद : प्रोफाइल

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रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति बन गए हैं। वे राष्ट्रीय जन‍तांत्रिक गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की उम्मीदवार मीरा कुमार को हराया। अत्यंत साधारण दलित परिवार से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचे रामनाथ कोविंद ने सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ते हुए इस शिखर तक का सफर तय किया है।  
 
रामनाथ कोविंद का जन्म उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविंद का विवाह 30 मई 1974 को सविता कोविंद से हुआ और उनके एक पुत्र तथा एक पुत्री है। उन्होंने परौंख गांव का पैतृक घर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को दान कर दिया। कोविंद का संबंध कोरी या कोली दलित जाति से है, जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है।
 
तीन भाइयों में सबसे छोटे रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर विकासखंड के ग्राम खानपुर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में हुई। उन्होंने डीएवी कॉलेज से बीकॉम तथा डीएवी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। 
 
वकालत की उपाधि लेने के पश्चात वे दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकील के तौर पर सक्रिय रहे हैं। वे 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। समाजसेवा में सक्रिय रहने वाले कोविंद भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रहे हैं।
 
8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई, लेकिन जब राज्यपाल पद पर उनकी नियुक्ति की गई थी तब भी यह कहा गया था कि भाजपा ने उनके सहयोगी दलों से समुचित विचार-विमर्श नहीं किया था। राज्यपाल के पद पर रहते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों में नाकाबिल लोगों के चयन और वित्तीय कुप्रबंधन तथा अयोग्य शिक्षकों की प्रोन्नति में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई।
 
कोविंद का बिहार का राज्यपाल बनने के पीछे भी उनकी मोदी से निकटता को माना जाता रहा था। कोविंद भाजपा के दलित नेताओं में बड़ा नाम है, लेकिन उन्हें कभी भी हाईप्रोफाइल नेता नहीं माना गया। वर्ष 1994 और 2000 में कोविंद उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए और 12 साल तक सांसद रहे। इस दौरान वे कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे। 
 
सांसद रहते हुए उन्होंने सांसद निधि से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में स्कूल के भवनों का निर्माण कराया और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में योगदान दिया। सांसद रहते हुए उन्होंने थाईंलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका का दौरा किया। 
 
रामनाथ कोविंद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे हैं। कोविंद के नाम की घोषणा को भाजपा की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। 
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