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बीएचयू में आधी रात को भड़की हिंसा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

Webdunia
रविवार, 24 सितम्बर 2017 (09:54 IST)
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छेड़खानी के खिलाफ छात्राओं के धरना-प्रदर्शन के दौरान शनिवार रात जमकर हिंसक घटनाएं हुईं, जिसमें कई आंदोलनकारी एवं पुलिसकर्मी घायल हो गए।
 
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बीएचयू परिसर में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। एहतियातन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गए हैं। विश्वविद्यालय परिसर में आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है।  
 
उन्होंने बताया कि बीएचयू के मुख्य द्वार पर छेड़खानी के विरोध में पिछले दो दिनों से धरने पर बैठीं छात्राएं रात अचानक उग्र हो गईं। उग्र भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिससे हालात बेकाबू होने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया और बीएचयू परिसर में कई जगह तोड़फोड़ की गई। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस घटना में कई छात्र-छात्राएं एवं पुलिसकर्मी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि शरारती तत्वों की तलाश की जा रही है।
 
उधर, छात्र-छात्राओं ने बताया कि 18 से अधिक आंदोलनकारी घायल हुए हैं। घायलों का इलाज बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जबकि कई घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
 
पुलिस अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में हालत काबू में हैं, लेकिन ऐहतियातन पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों का तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
 
विश्वविद्यालय के सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि शरारती तत्वों ने राजनीतिक कारणों से हिंसा को अंजाम दिया है। विश्वविद्यायल प्रशासन के अलावा पुलिस द्वारा पूरे मामले की जांच कर रही है।
 
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शनिवार शाम छात्राओं से कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की बातचीत विफल होने से आंदोलनकारी नाराज हो गए। छात्राएं प्रो. त्रिपाठी से धरना स्थल पर बातचीत करना चाहती थीं, जिसे सुरक्षा कारणों से विश्वविद्यालय प्रशासन शुरू में अस्वीकार कर दिया था। लेकिन भारी दबाव के बाद कुलपति अपने आवास के पास स्थित त्रिवेणी संकुल छात्रावास के पास छात्राओं से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान कुछ छात्र-छात्राओं की भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों ने उनके खिलाफ नारेबाजी और धक्कामुक्की कर दी, जिससे नाराज कुलपति अपने आवास पर लौट गए।
 
सूचना मिलते ही धरने पर बैठीं छात्राओं के साथ छात्र भी कुलपति आवास का घेराव करने जा रहे थे, जिन्हें बीएचयू के सुरक्षाकर्मी एवं पुलिसकर्मियों ने रास्ते में ही रोकने की कोशिशें की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस एवं आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं।  
 
 
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस ने लगभग 40 राउंड हवाई फायरिंग की। पुलिस कार्रवाई से नाराज बड़ी संख्या छात्र-छात्राएं छात्रावासों से निकलकर विश्वविद्यालय परिसर की सड़कों पर आ गये और प्रदर्शन करने लगे। पुलिस कर्मियों का आरोप है के उग्र भीड़ ने उन्हें निशाना बनाकर पत्थर एवं पेट्रोल बम फेंके, जिससे कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।
 
उधर, आंदोलकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और वे कुलपति से मिलने उनके आवास पर जा रहे थे। इसी दौरान बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने उन पर बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया, जिससे कई आंदोलनकारियों को गंभीर चोटें आई है।
 
छेड़छाड़ के खिलाफ सिर मुंडवाकर धरने पर बैठी बीएचयू की छात्रा अकांक्षा सिंह सहित कई छात्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं के साथ अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। 
 
सिंह का कहना है कि कुलपति के आवास से चंद कदमों की दूरी पर गत गुरुवार की शाम भी एक छात्रा के साथ छेड़खानी की गई। इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की गई थी लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, अधिकारियों ने छात्राओं को शाम में छात्रावास से बाहर नहीं निकलने की नसीहत दी। उनका कहना है कि इस मामले में प्रॉक्टर से भी कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन उन्होंने भी उसी प्रकार की नसीहत देकर मामले को टाल दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये से छात्राएं परेशान हैं और वह अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
 
इससे पहले आंदोलनकारी छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया था कि धरना-प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए कल त्रिवेणी संकुल छात्रावास को बाहर से बंद कर दिया गया था।
 
गौरतलब है कि छात्राओं के धरने-प्रदर्शन के कारण 22 सितंबर की देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूर्व निर्धारित यात्रा मार्ग बदलना पड़ा था। मोदी को इसी रास्ते दुर्गाकुंड मंदिर एवं तुलसी मानस मंदिर पूजा-अर्चना एवं अन्य कार्यक्रमों में जाना था, जिसे ऐन वक्त पर बदलना पड़ा था। बीएचयू छात्राओं का धरना-प्रदर्शन उसी दिन से चल रहा है, उससे एक दिन पूर्व उन्होंने सुरक्षा की मांग को लेकर रात में प्रदर्शन एवं हंगामा किया था। (वार्ता) 
 

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