Dharma Sangrah

प्रेम कविता : उसकी याद फिर से आई है...

राकेशधर द्विवेदी
उसकी याद फिर से आई है, 
दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है।
 
रात रो-रोकर कटी है कहीं पर,
कहीं सुबह हो रही विदाई है।
 
किसी के अरमानों का गला गया घोंटा,
किसी के अरमान सजकर आए हैं।
 
जिंदगी किसी की बन गई कांटे,
फूल किसी की जिंदगी के मुस्कुराए हैं।
 
अश्क आंखों में भर आए किसी के,
हंसी ओठों पे किसी के आई है।
 
किसी की फूलों से सज गई अर्थी,
किसी के गजरों की खुशबू आई है।
 
रात अमावस की किसी की आई है,
किसी ने हाथों में मेहंदी रचाई है।
 
आंख रो-रोकर लाल हुई किसी की,
किसी के लबों पर हंसी आई है।
 
उसकी याद फिर से आई है,
दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

सर्दियों में सेहत और स्वाद का खजाना है मक्के की राब, पीने से मिलते हैं ये फायदे, जानें रेसिपी

सर्दियों में रोजाना पिएं ये इम्यूनिटी बूस्टर चाय, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

Winter Superfood: सर्दी का सुपरफूड: सरसों का साग और मक्के की रोटी, जानें 7 सेहत के फायदे

Kids Winter Care: सर्दी में कैसे रखें छोटे बच्चों का खयाल, जानें विंटर हेल्थ टिप्स

सभी देखें

नवीनतम

Makar Sankranti Quotes: पतंग की उड़ान और तिल गुड़ की मिठास के साथ, अपनों को भेजें ये 10 सबसे खास शुभकामना संदेश

वैसे भी कवि विनोदकुमार शुक्‍ल की धरती पर लेखक को किसी तरह की अराजकता शोभा नहीं देती

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का तरीका, डोर और कचरी के साथ जानें पतंग के प्रकार

World Hindi Day: विश्व में भारतीयता का अहम परिचय ‘हिन्दी’

मकर संक्रांति और पतंगबाजी पर बेहतरीन कविता

अगला लेख