Russia-Ukraine War: पुतिन ने और सैनिक बुलाए, परमाणु विकल्प की धमकी देकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध किया तेज

Webdunia
गुरुवार, 22 सितम्बर 2022 (15:35 IST)
बर्मिंघम (यूके)। कथित पश्चिमी परमाणु ब्लैकमेल के जवाब में आंशिक लामबंदी और बहुत सारे रूसी हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध में एक बार फिर से तेजी ला दी है। पुतिन ने  परमाणु विकल्प की भी धमकी दी है।
 
वास्तव में पुतिन ने बस इतना ही कहा कि जब हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा होता है तो हम रूस और अपने लोगों की रक्षा के लिए हमारे पास उपलब्ध सभी साधनों का उपयोग करेंगे, यह कोई झांसा नहीं है। यह नवीनतम वृद्धि 20 सितंबर को यूक्रेन के उन क्षेत्रों में जनमत संग्रह की घोषणा के बाद हुई है जिन पर वर्तमान में रूस का कब्जा है। यह यूक्रेन में तेजी से बढ़ रही विकट स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए रूसी राष्ट्रपति का ताजा दांव लगता है।
 
पुतिन सुबह 9 बजे (मॉस्को समय) टेलीविजन पर रूसी लोगों से बात कर रहे थे जिसमें जोर देकर कहा गया कि इसके 20 लाख मजबूत सैन्य बलों की आंशिक सैन्य लामबंदी रूस और उसके क्षेत्रों की रक्षा के लिए थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम यूक्रेन में शांति नहीं चाहता है, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन, लंदन और ब्रुसेल्स हमारे देश को लूटने के उद्देश्य से कीव को हमारे क्षेत्र में सैन्य अभियानों को स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
 
परिचित रणनीति : यूक्रेन के पूर्व में जनमत संग्रह के माध्यम से क्षेत्र पर कब्जा करने की रूस की योजना एक स्थापित प्रथा का अनुसरण करती है, लेकिन यह युद्ध में वृद्धि का एक नया दौर भी बनाती है, जो पिछले 7 महीनों में पुतिन के अनुसार नहीं चल रहा है।
 
मार्च 2014 में रूस द्वारा प्रायद्वीप पर कब्जा करने के बाद जल्दबाजी में हुए जनमत संग्रह के आधार पर पुतिन ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया और फरवरी 2022 में यूक्रेन में रूसी सेना को भेजने से कुछ दिन पहले उन्होंने डोनेट्स्क और लुहान्स्क गणराज्यों की स्वतंत्रता को मान्यता दी। 2014 से रूस और उसके स्थानीय साथी पर्दे के पीछे के इन क्षेत्रों में 'शांति सेना' की तैनाती कर रहे थे।
 
पुतिन ने मात्र 2 दिन बाद ही यूक्रेन के खिलाफ अपने अवैध युद्ध के लिए इन्हीं क्षेत्रों को लॉन्च पैड के रूप में इस्तेमाल किया। इस आक्रमण के परिणामस्वरूप रूस ने यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र पर कब्जा कर लिया मुख्य रूप से पूर्व में। पिछले कई हफ्तों में मॉस्को ने इनमें से कुछ क्षेत्रों को फिर से खो दिया है, लेकिन अभी भी लगभग 90,000 वर्ग किमी इलाके पर उसका नियंत्रण है, ज्यादातर डोनबास क्षेत्र में और यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में।
 
क्रेमलिन द्वारा डोनेट्स्क, लुहान्स्क, ज़ापोरिज़्ज़िया और खेरसॉन क्षेत्रों के बड़े हिस्से में तैनात अस्थायी अधिकारियों ने अब मॉस्को से कहा है कि वह इन क्षेत्रों को रूसी संघ में शामिल करने के लिए जनमत संग्रह कराए। जनमत संग्रह 23 और 27 सितंबर के बीच होने की संभावना है और रूसी संसद से उम्मीद की जाती है कि वह पुतिन के हस्ताक्षर करने के बाद शीघ्र ही किसी भी निर्णय की पुष्टि करेगा। 2014 में क्रीमिया में भी इसी तरह की प्रक्रिया हुई थी।
 
एक अलग तरह की वृद्धि : 2014 में यूक्रेन ने क्रीमिया पर ज्यादा लड़ाई नहीं की और इसके आतंकवाद विरोधी अभियान को जल्दी से रोक दिया गया, क्योंकि रूस ने अपने स्थानीय प्रॉक्सी की मदद के लिए डोनबास में भारी संख्या में सैनिकों और संसाधनों को भेज दिया था।
 
8 महीने की भारी लड़ाई के बाद फरवरी 2015 में मिन्स्क शांति समझौते की अंतिम किस्त के रूप में इसके दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम सामने आए जिसके तहत 7 साल की असफल वार्ता प्रक्रिया किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब इस बात की कोई संभावना नहीं है कि कीव और उसके पश्चिमी साझेदार इस तरह के किसी सौदे को स्वीकार करने जा रहे हैं, जो मॉस्को को फिर से संगठित होने और अपने अगले कदम की योजना बनाने के लिए समय देगा।
 
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ समेत यूक्रेनी और पश्चिमी नेता इस बारे में पहले ही बहुत कुछ कह चुके हैं। जनमत संग्रह की घोषणा और वे जो कुछ भी कहते हैं, वह पश्चिम के लिए एक सीधी चुनौती है नाटो और यूरोपीय संघ में नीति-निर्माताओं को एक यूक्रेन का समर्थन जारी रखने के लिए जिसे अब रूस हमलावर ठहरा रहा है। इससे रूस और पश्चिम के बीच सीधे टकराव का खतरा काफी बढ़ जाएगा और एक बार फिर रूस के परमाणु हथियारों का सहारा लेने की आशंका बढ़ जाएगी।
 
पुतिन का आखिरी दांव? : इस सबसे सवाल उठता है कि पुतिन कितनी दूर जा सकते हैं और जाएंगे? वे अब तक अपने अधिकांश पत्ते खेल चुके हैं और अभी भी जीत नहीं रहे हैं। पश्चिम के खिलाफ ऊर्जा ब्लैकमेल भी नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्यों और उनके सहयोगियों के संयुक्त मोर्चे को तोड़ नहीं पाया है। पुतिन के समर्थक कम हैं और दूर हैं और वे संदिग्ध कंपनियां हैं- ईरान और सीरिया, उत्तर कोरिया और म्यांमार।
 
चीन, रूसी तेल और गैस खरीद सकता है लेकिन शी ने अभी तक यूक्रेन पर पुतिन का साथ खुलेतौर पर नहीं दिया है और ऐसा करने की संभावना नहीं है, खासकर अगर कब्जे वाले क्षेत्रों में नियोजित जनमत संग्रह के परिणामस्वरूप युद्ध में और वृद्धि हुई तो। इन सबसे ऊपर पुतिन, यूक्रेन में जमीन पर नहीं जीत रहे हैं। दांव लगाने का उनका नवीनतम हताश प्रयास इसका अभी तक का सबसे स्पष्ट संकेत है लेकिन यह भी एक संकेत है कि इससे पहले से ही भयावह स्थिति कितनी अधिक खतरनाक हो सकती है।(भाषा)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

भारत कोई धर्मशाला नहीं, लोकसभा में बोले अमित शाह, इमिग्रेशन बिल 2025 पास

रोहिंग्या हो या बांग्लादेशी घुसपैठिए, सब पर लगेगी लगाम, लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने बताया प्लान

Ranya Rao को तीसरी बार झटका, जमानत याचिका नामंजूर, जानिए Gold smuggling case में अब तक क्या-क्या हुआ

Hurun Global rich List : 284 अरबपतियों के पास भारत की GDP का एक तिहाई हिस्सा, मुकेश अंबानी एशिया में सबसे अमीर

क्‍या है सत्‍ता जिहाद जिसे लेकर उद्धव ठाकरे ने साधा पीएम मोदी पर निशाना?

सभी देखें

नवीनतम

गाय के गोबर से अखिलेश यादव को आई दुर्गंध, भाजपा ने इस तरह साधा निशाना

Weather Update : दिल्ली-NCR में बदला मौसम, उत्‍तर भारत में पारा 35 के पार, जानिए देशभर का हाल

ऑक्सफोर्ड में ममता बनर्जी के भाषण के दौरान हंगामा, इस तरह दिया तीखे सवालों का जवाब

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मुठभेड़, 3 आतंकवादी ढेर, 3 पुलिसकर्मी शहीद

LIVE: कठुआ मुठभेड़ में 3 कांस्टेबल बलिदान, 3 आतंकी ढेर

अगला लेख