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कौए और उल्लू की आवाज, जानिए क्या देती है संकेत

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अक्सर कौए और उल्लू की आवाज को मनहूसीयत से जोड़कर देखा जाता है लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। देखना होगा कि आखिर कौए या उल्लू की आवाज किसी बात का संकेत देती है। हालांकि यह धारणा जनश्रुति पर आधारित ही। ऐसी किसी बात में विज्ञान खोजना मुश्‍किल होता है। यह परंपरा और मान्यता पर आधारित बातें होती है। इसे अंधविश्वास भी माना जाता है।
 
कौए की आवाज :
*प्रथम प्रहर में कौए की आवाज सुनाई दे तो अतिथि आ सकता है।
*दूसरे पहर में व्यापार में लाभ हो सकता है।
*प्रथम प्रहर में दक्षिण दिशा में कौए की आवाज सुनाई देना अर्थ लाभ कराता है।
*मध्यान्ह में सुनाई दे तो पद की प्राप्ति होती है।
*लेकिन तीसरे और चौथे प्रहर की आवाज का मतलब यह कि खराब संदेश प्राप्त होगा।
*किसी नगर या ग्राम में कौओं का झुंड इक्ट्ठा हो तो विवाद का कारण बनता है।
*यदि किसी कौए का झुंड उच्च स्वर में शोर मचाए तो उस स्थान पर कोई संकट हो सकता है।
*घर पर बहुत सारे कौओं का बैठना मृत्यु तुल्य कष्ट देता है।
*चलते हुए सिर पर कौओं का स्पर्श करना भी स्वास्थ्य और आयु के लिए अच्छा नहीं होता।
*रात में कौवे बोले, दिन में गीदड़ बोले तो अवश्य ही कोई बड़ा उपद्रव होगा। 
 
उल्लू की आवाज :
*उल्लू का रोना भी किसी गंभीर संकट की सूचना होती है।
*यदि उल्लू की आवाज रात्रि के प्रथम प्रहर, द्वितिय और चतुर्थ प्रहर में सुनाई दे तो इच्छा के पूर्ण होने के संकेते हैं। इससे अर्थ लाभ, व्यापार में लाभ और राजदरबार आदि में लाभ मिलेगा।
*लेकिन एक ही दिशा में उल्लू का बार-बार आवाज देना, उसका दिखना, ज्यादा कल्याणकारी नहीं है। यह संकट की सूचना है या इसे आपकी सेहत खराब होने की सूचना भी माना जा सकता है।
*अगर उल्लू बार बार उच्च स्वार में बोले तो आर्थिक हानि का संकेत है।
*अगर रात में आप यात्रा के लिए निकल रहे हैं और उल्लू प्रसन्नता पूर्वक मध्यम स्वर में बोले तो यह शुभ संकेत है।

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