Hanuman Chalisa

अखंड भारत बनने की कहानी

अनिरुद्ध जोशी
अखंड बोलना इसलिए पड़ता है क्योंकि सबकुछ खंड-खंड हो चला है। जम्बूद्वीप से छोटा है भारतवर्ष। भारतवर्ष में ही आर्यावर्त स्थित था। आज न जम्बूद्वीप है न भारतवर्ष और न आर्यावर्त। आज सिर्फ हिन्दुस्थान है और सच कहें तो यह भी नहीं। आओ जानते हैं भारतवर्ष के बनने की कहानी।
 
 
1.इंद्र के बाद व्यवस्थाएं बदली और स्वायंभुव मनु संपूर्ण धरती के शासन बने। उनके काल में धरती सात द्वीपों में बंटी हुई थी। जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर। इसमें से जम्बू द्वीप सभी के बीचोबीच स्थित है। जिसमें से सिर्फ जम्बूद्वीप पर ही अधिकांश आबादी रहती थी। बाकी द्वीपों पर नाम मात्र के ही जीव रहते थे। स्वायंभुव मनु के बाद उनके पुत्र प्रियव्रत धरती के राजा बने।
 
 
2.राजा प्रियव्रत ने विश्वकर्मा की पुत्री बहिर्ष्मती से विवाह किया था जिनसे आग्नीध्र, यज्ञबाहु, मेधातिथि आदि 10 पुत्र उत्पन्न हुए। प्रियव्रत की दूसरी पत्नी से उत्तम, तामस और रैवत ये 3 पुत्र उत्पन्न हुए, जो अपने नाम वाले मन्वंतरों के अधिपति हुए। महाराज प्रियव्रत के 10 पुत्रों में से कवि, महावीर तथा सवन ये 3 नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे और उन्होंने संन्यास धर्म ग्रहण किया था।
 
 
3.राजा प्रियव्रत ने धरती का विभाजन कर अपने 7 पुत्रों को अलग-अलग द्वीप का शासक बना दिया। आग्नीध्र को जम्बूद्वीप मिला। वृद्धावस्था में आग्नीध्र ने अपने 9 पुत्रों को जम्बूद्वीप के विभिन्न 9 स्थानों का शासन का दायित्व सौंपा। जम्बूद्वीप के 9 देश थे- इलावृत, भद्राश्व, किंपुरुष, नाभि (भारत), हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरु और हिरण्यमय।
 
 
4.इन 9 पुत्रों में सबसे बड़े थे नाभि जिन्हें हिमवर्ष का भू-भाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़कर अजनाभवर्ष प्रचारित किया। यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। राजा नाभि के पुत्र थे ऋषभ। ऋषभदेव के 100 पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। उनके नाम पर इस देश का नाम भरत पड़ा।
 
 
5.प्राचीनकाल में यह अखंड भारतवर्ष हिन्दूकुश पर्वत माला से अरुणाचल और अरुणाचल से बर्मा, इंडोनेशिया तक फैला था। दूसरी ओर यह कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी-श्रीलंका तक और हिन्दूकुश से नीचे सिंधु के अरब सागर में मिलने तक फैला था। यहां की प्रमुख नदियां सिंधु, सरस्वती, गंगा, यमुना, कुम्भा, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, महानदी, शिप्रा आदि हैं। 16 जनपदों में बंटे इस क्षेत्र को भारतवर्ष कहते हैं।
 
 
6.समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में भारतवर्ष स्थित है। इसका विस्तार 9 हजार योजन है। इसमें 7 कुल पर्वत हैं : महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान, ऋक्ष, विंध्य और पारियात्र। भारतवर्ष के 9 खंड : इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गन्धर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है।
 
 
7.भारत में कई छोटे और बड़े युद्ध होते रहे। जैसे, देवासुर संग्राम, इंद्र और वृत्तासुर युद्ध, दाशराज्ञ का युद्ध, हैहय-परशुराम युद्ध, राम-रावण का युद्ध, चंद्रगुप्त मौर्य-धननंद का युद्ध, सम्राट अशोक-कलिंग का युद्ध। लेकिन उक्त सभी युद्ध के दौरान भारत को अंखंड किए जाने का कार्य ही किया जाता रहा। हालांकि सिकंदर और पोरस युद्ध के बाद भारत में स्थितियां बदलती गई। अखंड भारत खंड-खंड होता चला गया।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

हिंदू पुराण, ज्योतिष, नास्त्रेदमस, बाबा वेंगा और भविष्‍य मालिका की 6 कॉमन भविष्यवाणियां

सूर्य का मीन राशि में गोचर: इन 6 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन के नए रास्ते

चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें कलश स्थापना का सही समय

हिंदू नववर्ष 2083 के कौन है वर्ष का राजा और मंत्री, किन राशियों पर रहेगा शुभ प्रभाव

विक्रम संवत सबसे प्राचीन होने के बाद भी भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर क्यों नहीं बना? जानिए 3 बड़े कारण

सभी देखें

धर्म संसार

19 March Birthday: आपको 19 मार्च, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (19 मार्च, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 19 मार्च 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

नवरात्रि में करें पीली सरसों का यह अचूक उपाय, खुल सकते हैं धन प्राप्ति के रास्ते

चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा 2026: घटस्थापना, पूजा मुहूर्त, 9 रंग, क्या खाएं-क्या नहीं, पूरी जानकारी

अगला लेख