rashifal-2026

शरद पूर्णिमा का चांद क्यों माना जाता है इतना महत्वपूर्ण

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार क्या है शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा का धार्मिक महत्व

WD Feature Desk
सोमवार, 14 अक्टूबर 2024 (15:32 IST)
Sharad Purnima moon significance: शरद पूर्णिमा का चांद हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे आश्विन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इस दिन को देवी लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात चांदनी का विशेष महत्व होता है, और इसे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया है।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
1. देवी लक्ष्मी की कृपा का दिन
शरद पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी का दिन भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। जो लोग इस रात जागरण और पूजा करते हैं, उन्हें समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

2. भगवान कृष्ण और गोपियों की कथा
एक और प्रमुख कथा भगवान कृष्ण और गोपियों से जुड़ी है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण ने रास लीला का आयोजन किया था। इस रात को उन्होंने अपनी बांसुरी की धुन से गोपियों को आकर्षित किया और रास लीला के माध्यम से दिव्य प्रेम का संदेश दिया। इसलिए, यह दिन प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
ALSO READ: शरद पूर्णिमा पर जानिए चांद की सोलह कलाएं और उनका महत्व
 
शरद पूर्णिमा और स्वास्थ्य का क्या है सम्बन्ध
1. चांदनी की वैज्ञानिक दृष्टि से महत्ता
विज्ञान की दृष्टि से भी शरद पूर्णिमा की रात का महत्व बताया गया है। इस दिन की चांदनी में विशेष औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर और मन को शांति प्रदान करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में रखे खीर को खाने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यह खीर शरीर को ठंडक और ताजगी देती है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है।

2. मानसिक शांति और ध्यान में चन्द्रमा का योगदान
इस दिन का आध्यात्मिक पक्ष भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात ध्यान और योग के लिए सर्वोत्तम होती है। चांद की ऊर्जा से सकारात्मकता का अनुभव होता है, जो मन को शांत और शरीर को ऊर्जावान बनाता है।

शरद पूर्णिमा से जुड़े अनुष्ठान
1. खीर का प्रसाद
शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चांदनी के नीचे रखने की परंपरा है। माना जाता है कि चांदनी की किरणें खीर को औषधीय गुण प्रदान करती हैं। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में परिवार और मित्रों में बांटा जाता है।

2. रात भर जागरण और भजन
इस दिन रातभर जागरण और भजन करने का भी विशेष महत्व है। भक्तगण देवी लक्ष्मी और भगवान कृष्ण के भजन गाकर पूरी रात जागरण करते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जनवरी माह 2026 में कैसा रहेगा 12 राशियों का राशिफल

नए साल 2026 के संकल्प: क्यों 90% लोग फेल हो जाते हैं और आप कैसे सफल हो सकते हैं?

न्यू ईयर राशिफल 2026: किस राशि के लिए शुभ और किसके लिए है अशुभ?

जनवरी 2026 में 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा

2026 में ऑनलाइन ज्योतिष (Astrology) परामर्श के लिए 10 भरोसेमंद ज्योतिष वेबसाइट्‍स

सभी देखें

धर्म संसार

New Year Horoscope 2026: साल 2026 में चमकने वाली हैं इन 5 राशियों की किस्मत, जानें ग्रहों के गोचर का पूरा हाल

01 January Birthday: आपको 1 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 01 जनवरी 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

नववर्ष 2026 में मंदिर न जा पाएं तो करें यहां दर्शन

January 2026 Vrat Dates: जनवरी माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट

अगला लेख