Biodata Maker

shraddha Paksha 2025: श्राद्ध पक्ष में दशमी तिथि का श्राद्ध कैसे करें, जानिए कुतुप काल मुहूर्त और सावधानियां

WD Feature Desk
सोमवार, 15 सितम्बर 2025 (12:05 IST)
Dashami Shraadh dos and donts: पितृ पक्ष/ श्राद्ध पक्ष हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र काल होता है, जब हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। यह समय अत्यंत श्रद्धा और संयम से जीने का होता है। इस दिन शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है।ALSO READ: Shradha Paksha 2025: श्राद्ध पक्ष के बाद इन 96 दिनों में कर सकते हैं श्राद्ध कर्म
 
श्राद्ध पक्ष में दशमी का श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका देहावसान किसी भी माह की दशमी तिथि को हुआ हो। इस श्राद्ध को 'दशमी श्राद्ध' भी कहते हैं। इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि, सफलता और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
 
दशमी श्राद्ध मंगलवार, सितंबर 16, 2025 को
 
दशमी श्राद्ध 2025 की तिथि और मुहूर्त
तिथि: 16 सितंबर 2025, मंगलवार
दशमी तिथि प्रारम्भ- 16 सितंबर 2025 को 01:31 ए एम बजे
दशमी तिथि समाप्त- 17 सितंबर 2025 को 12:21 ए एम बजे
 
दशमी श्राद्ध अनुष्ठान समय
कुतुप मुहूर्त - 12:09 पी एम से 12:58 पी एम
अवधि - 00 घण्टे 49 मिनट्स
 
रौहिण मुहूर्त - 12:58 पी एम से 01:47 पी एम
अवधि - 00 घण्टे 49 मिनट्स
 
अपराह्न काल - 01:47 पी एम से 04:13 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 27 मिनट्स
 
दशमी श्राद्ध करने की विधि: ALSO READ: Shradh Paksha 2025: श्राद्ध कर्म नहीं करने पर क्या होता है?
1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके उसे पवित्र करें।
 
2. तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे के बर्तन में जल, दूध, जौ, चावल, सफेद फूल और काले तिल मिलाकर तर्पण करें।
 
3. पिंडदान: पितरों के लिए आटे और चावल से बने पिंडों को तैयार करें और उन्हें श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
 
4. भोजन: पितरों के लिए उनकी पसंद का सात्विक भोजन (जैसे खीर, पूड़ी, सब्ज़ियां) बनाएं। ध्यान रखें कि भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग न हो।
 
5. पंचबलि: भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवा, कुत्ता, चींटी और देवता के लिए अलग निकालें।
 
6. ब्राह्मण भोजन: कुतुप मुहूर्त में किसी योग्य ब्राह्मण को घर पर बुलाकर भोजन कराएं और उन्हें सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा और वस्त्र देकर आदरपूर्वक विदा करें।
 
7. प्रार्थना: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक जलाकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
 
सावधानियां :
• श्राद्ध कर्म करते समय लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
 
• सोने, चांदी, तांबे या कांसे के बर्तनों का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
 
• घर में शांति और सद्भाव बनाए रखना चाहिए।
 
• किसी से भी झगड़ा या बहस करने से बचें।
 
• किसी भी पशु-पक्षी को कष्ट न पहुंचाएं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पितृ किसी भी रूप में हमारे आसपास हो सकते हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित  वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत  या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।ALSO READ: Shradh paksha: श्राद्ध पक्ष में बच्चों का श्राद्ध कर्म: कब और कैसे करना चाहिए, करें या नहीं?
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

सूर्य का मकर राशि में गोचर, 12 राशियों का राशिफल, किसे होगा लाभ और किसे नुकसान

2026 में इन 4 राशियों का होगा पूरी तरह कायाकल्प, क्या आप तैयार हैं?

शाकंभरी माता की आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Shakambari mata ki aarti

Basant Panchami 2026: वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का त्योहार कब मनाए जाएगा

क्या सच में फिर से होने वाला है ऑपरेशन सिंदूर प्रारंभ, क्या कहती है भविष्यवाणी

सभी देखें

धर्म संसार

माघ शुक्ल चतुर्थी को कहां मनाई जाती है गणेश जयंती?

मौनी अमावस्या की पौराणिक कथा Mauni Amavasya Katha

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (16 जनवरी, 2026)

16 January Birthday: आपको 16 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से शुक्र होगा मजबूत और मिलेगा शिवजी और लक्ष्मी माता का आशीर्वाद, जानें उपाय

अगला लेख