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shraddha Paksha 2025: श्राद्ध पक्ष में सप्तमी तिथि का श्राद्ध कैसे करें, जानिए कुतुप काल मुहूर्त और सावधानियां

WD Feature Desk
शनिवार, 13 सितम्बर 2025 (09:30 IST)
Pitru Paksha Saptami 2025: पितृ पक्ष के दौरान, प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। पितृ पक्ष में सप्तमी तिथि का श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनका निधन सप्तमी तिथि को हुआ हो। यह श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन विधिवत श्राद्ध करने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इन दिनों कुतुप काल को श्राद्ध कर्म करने के लिए सबसे शुभ और महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मुहूर्त में किए गए कर्मों का फल सीधे पितरों को प्राप्त होता है।ALSO READ: Impact of Lunar eclipse: चंद्र ग्रहण से नेपाल में उत्पात और अब सूर्य ग्रहण से होगा महासंग्राम
 
सप्तमी श्राद्ध तिथि और मुहूर्त 2025
श्राद्ध अनुष्ठान तिथि: शनिवार, 13 सितंबर 2025
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2025 को सुबह 07:23 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2025 को सुबह 05:04 बजे।
 
कुतुप काल का मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त 12:10 से 12:59 तक।
कुतुप मुहूर्त- दोपहर 12:10 से 12:59 तक।
अवधि- 00 घंटे 49 मिनट्स
रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:59 से 01:48 तक।
अवधि- 00 घंटे 49 मिनट्स
अपराह्न काल- दोपहर 01:48 से 04:15 तक।
अवधि- 02 घंटे 27 मिनट्स
 
श्राद्ध कैसे करें? सप्तमी श्राद्ध की विधि और सावधानियां
 
श्राद्ध करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया है, जो अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए की जाती है। इसे विधि-विधान से करने पर ही इसका पूर्ण फल मिलता है। श्राद्ध की सामान्य विधि इस प्रकार है:
 
श्राद्ध की तैयारी
• तिथि का चयन: श्राद्ध हमेशा उसी तिथि पर करें, जिस तिथि को आपके पूर्वज का निधन हुआ था। अगर तिथि याद नहीं है तो अमावस्या पर श्राद्ध कर सकते हैं, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं।
 
• सामग्री: श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटा लें। इसमें चावल, जौ, काले तिल, गाय का दूध, गंगाजल, कुश (एक प्रकार की घास), फूल, घी, शक्कर और सात्विक सब्जियां शामिल होती हैं।
 
• स्थान और शुद्धि: श्राद्ध घर के किसी पवित्र स्थान पर या नदी के किनारे किया जाता है। श्राद्धकर्ता यानी श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ, बिना सिलाई वाले वस्त्र पहनने चाहिए।ALSO READ: shraddha Paksha 2025: श्राद्ध पक्ष में षष्ठी तिथि का श्राद्ध कैसे करें, जानिए कुतुप काल मुहूर्त और सावधानियां
 
श्राद्ध की विधि
1. तर्पण:
- सबसे पहले पूर्वजों को तर्पण दिया जाता है।
- एक पात्र में जल, काले तिल और दूध मिलाएं।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके इस जल को अंजुलि में लेकर धीरे-धीरे धरती पर गिराएं।
- ऐसा करते समय अपने पूर्वजों का स्मरण करें और 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जाप करें।
 
2. पिंडदान:
- चावल के आटे, जौ के आटे या उबले हुए चावलों को मिलाकर पिंड बनाएं।
- इन पिंडों को कुश के आसन पर रखें।
- एक-एक करके पिंडों को अपने पूर्वजों के नाम से अर्पित करें और उन्हें जल दें।
 
3. ब्राह्मणों को भोजन:
- श्राद्ध में ब्राह्मणों को भोजन कराना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
- एक या तीन ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराएं।
- भोजन में खीर, पूड़ी, सब्जी और अन्य सात्विक पकवान शामिल करें।
- भोजन के बाद, ब्राह्मणों को वस्त्र, दक्षिणा और अन्य वस्तुएं दान करें।
 
4. पंचबलि:
- भोजन का कुछ अंश निकालकर पांच अलग-अलग हिस्सों में रखें:
* कौआ बलि: कौए के लिए
* श्वान बलि: कुत्ते के लिए
* गो बलि: गाय के लिए
* देवादि बलि: देवताओं के लिए
* पिपीलिका बलि: चींटियों के लिए
- माना जाता है कि इन जीवों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है।
 
5. क्षमा याचना और आशीर्वाद:
- श्राद्ध कर्म के अंत में, अपने पूर्वजों से अपनी अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और उनसे अपने परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।
 
ध्यान रखने योग्य सावधानियां
• श्राद्ध के दिन घर में लहसुन, प्याज, मांसाहार का प्रयोग न करें।
• इस दिन ब्रह्मचर्य व्रत धारण करना चाहिए।
• श्राद्धकर्ता बाल और नाखून न काटें।
• श्राद्ध के दौरान घर में झगड़े या कलह से बचें।
• श्राद्ध का भोजन बाहर के किसी व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।
 
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