Hanuman Chalisa

सावधान... इन तिथियों में ना तोड़ें बिल्वपत्र

पं. हेमन्त रिछारिया
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बिल्वपत्र बहुत प्रिय है। शिवजी की आराधना बिल्वपत्रों के बिना अधूरी है लेकिन इसका आशय यह नहीं कि हम शिवजी को बिल्वपत्र अर्पण करने के आकांक्षा में बिल्व के वृक्षों को ही उजाड़ दें। अधिकांश लोग यह सोचकर अधिक मात्रा में बिल्वपत्र अर्पण करते हैं कि शायद अधिक बिल्वपत्र अर्पण करने से उन्हें शिवजी की अधिक कृपा प्राप्त होगी। यह एक भ्रान्त धारणा है क्योंकि परमात्मा तो भावप्रधान होते हैं ना कि परिमाण प्रधान। पूर्ण प्रेमासिक्त और फ़लाकांक्षा रहित भाव से अर्पित किया गया एक छोटा बिल्व पत्र भी वह फ़ल दे सकता है जो फ़लाकांक्षा से अर्पित किए गए लाखों बिल्वपत्र नहीं दे सकते। 
 
ALSO READ: 1 करोड़ कन्यादान का फल देता है बिल्वपत्र का अर्पण
 
'लक्षार्चन' व 'लाखोत्री' जैसी परम्पराएं जिनमें लाखों की मात्रा में पुष्प या बिल्वपत्र अर्पण करने होते हैं, पूर्णतया अनुचित है। प्रकृति परमात्मा का ही प्रकट रूप है। उसे हानि पहुंचाना उचित नहीं। हमारे मतानुसार यदि आप लक्षार्चन करना ही चाहते हैं तो बिल्वपत्र का एक पौधा रोपित करें जिस दिन आपके द्वारा रोपित पौधा बड़ा होकर वृक्ष बनेगा और उस बिल्वपत्र के वृक्ष पर लाखों पत्तियां आ जाएँगी उस दिन आपका 'लक्षार्चन'  पूर्ण हो जाएगा। 
 
वृक्षों को पुष्प व पत्तों से नग्न कर भला कोई लक्षार्चन कैसे सफ़ल हो सकता है! नारद जी ने 'मानस'  पुष्प को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए इन्द्र से कहा था कि करोड़ों बाह्य पुष्पों को चढ़ाकर जो फ़ल प्राप्त होता है वह केवल एक मानस-पुष्प चढ़ाने से प्राप्त हो जाता है। हमारे शास्त्रों में पुष्पों को तोड़ने के नियम व मंत्र निर्धारित हैं। ठीक उसी प्रकार बिल्वपत्र के तोड़ने का भी समय व मंत्र है।

ALSO READ: शिव जी को बिल्वपत्र चढ़ाने से मिलते हैं कौन से शुभ फल
 
बिल्वपत्र तोड़ते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए-
 
"अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा।
गृह्णामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात् ॥"
 
शास्त्रों में बिल्वपत्र तोड़ने का निषिद्ध काल तय है। इन तिथियों में बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

 
सावन सोमवार की पवित्र और पौराणिक कथा (देखें वीडियो) 
 
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश से बदलेंगे वैश्विक हालात? जानें भविष्यफल

सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ, राशिफल

घर में रात में चमगादढ़ घुसने के हैं 6 कारण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत बरतें ये सावधानियां

सभी देखें

धर्म संसार

राहु का कुंभ में डेरा: 31 अक्टूबर तक इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, आएगा बंपर उछाल

आल्हा जयंती कैसे और कब मनाई जाती है?

Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?

सूर्य और बुध की वृषभ राशि में युति, बुधादित्य योग से 6 राशियों को होगा फायदा

मिथुन राशि में गुरु-शुक्र की दुर्लभ युति, 3 राशियों पर होगी धन और सुख की बारिश

अगला लेख