Dharma Sangrah

गुरु अर्जुन देव जयंती : 10 बड़ी बातें

Webdunia
1. 12 अप्रैल, बुधवार के दिन गुरु अर्जुन देव जी (Guru Arjan Dev ji) की जयंती मनाई जा रही है। उनकी तथा धार्मिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना तथा निर्मल प्रवृत्ति, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठता को देखते हुए गुरु रामदास जी ने 1581 में पांचवें गुरु के रूप में उन्हें गुरु गद्दी पर सुशोभित किया। 
 
2. गुरु अर्जुन (अर्जन) देव का जन्म सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु रामदासजी व माता भानीजी के घर वैशाख वदी सप्तमी (7), (संवत 1620 में 15 अप्रैल 1563) को गोइंदवाल (अमृतसर) में हुआ था। 
 
3. श्री गुरु अर्जुन देव साहिब सिख धर्म के 5वें गुरु है। वे शिरोमणि, सर्वधर्म समभाव के प्रखर पैरोकार होने के साथ-साथ मानवीय आदर्शों को कायम रखने के लिए आत्म बलिदान करने वाले एक महान आत्मा थे। सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी वे डंटकर खड़े रहे। वे आध्यात्मिक चिंतक एवं उपदेशक के साथ ही समाज सुधारक भी थे।
 
4. गुरु अर्जुन देव जी निर्मल प्रवृत्ति के थे, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठता तथा मानवीय मूल्यों और धर्म के प्रति समर्पण भावना आदि सभी गुण उनमें थे, जिसे देखते हुए सन् 1581 में गुरु रामदासजी ने 5वें गुरु के रूप में गुरु अर्जुन देव को गुरु गद्दी सौंप दी थी।
 
5. इस दौरान उन्होंने गुरुग्रंथ साहिब का संपादन किया, जो मानव जाति को सबसे बड़ी देन है। संपूर्ण मानवता में धार्मिक सौहार्द पैदा करने के लिए अपने पूर्ववर्ती गुरुओं की वाणी को जगह-जगह से एकत्र कर उसे धार्मिक ग्रंथ में बांटकर परिष्कृत किया। गुरुजी ने स्वयं की उच्चारित 30 रागों में 2,218 शबदों को भी श्री गुरुग्रंथ साहिब में दर्ज किया है। 
 
6. एक समय की बात है। उन दिनों बाला और कृष्णा पंडित सुंदरकथा करके लोगों को खुश किया करते थे और सबके मन को शांति प्रदान करते थे। एक दिन वे गुरु अर्जुन देव जी के दरबार में उपस्थित हुए और प्रार्थना करने लगे- महाराज...! हमारे मन में शांति नहीं है। आप ऐसा कोई उपाय बताएं जिससे हमें शांति प्राप्त होगी? तब गुरु अर्जुन देवजी ने कहा- अगर आप मन की शांति चाहते हो तो जैसे आप लोगों को कहते हो उसी प्रकार आप भी करो, अपनी कथनी पर अमल किया करो। परमात्मा को संग जानकर उसे याद रखा करो। अगर आप सिर्फ धन इकट्‍ठा करने के लालच से कथा करोगे तो आपके मन को शांति कदापि प्राप्त नहीं होगी। बल्कि उल्टा आपके मन का लालच बढ़ता जाएगा और पहले से भी ज्यादा दुखी हो जाओगे। अपने कथा करने के तरीके में बदलाव कर निष्काम भाव से कथा करो, तभी तुम्हारे मन में सच्ची शांति महसूस होगी। 
 
7. एक दिन गद्दी पर बैठने के बाद गुरु अर्जुन देव जी के मन में विचार आया कि सभी गुरुओं की बानी का संकलन कर एक ग्रंथ बनाना चाहिए। जल्द ही उन्होंने इस पर अमल शुरू कर दिया। उस समय नानकबानी की मूल प्रति गुरु अर्जुन के मामा मोहन जी के पास थी। उन्होंने वह प्रति लाने भाई गुरदास को मोहन जी के पास भेजा तो उन्होंने वह प्रति देने से इंकार कर दिया। इसके बाद भाई बुड्ढा गए, वे भी खाली हाथ लौट आए। तब गुरु अर्जुन स्वयं उनके घर पहुंच गए। सेवक ने उन्हें घर में प्रवेश से रोक दिया। गुरु अर्जुन देव जी भी धुन के पक्के थे। वे द्वार पर ही बैठकर अपने मामा से गा-गाकर विनती करने लगे। इस पर मोहन जी ने उन्हें बहुत डांटा-फटकारा और ध्यान करने चले गए। लेकिन गुरु पहले की तरह गाते रहे। अंततः उनके धैर्य, विनम्रता और जिद को देखकर मोहन जी का दिल पसीजा और वे बाहर आकर बोले- बेटा, नानकबानी की मूलप्रति मैं तुम्हें दूंगा, क्योंकि तुम्हीं उसे लेने के सही पात्र हो। 
 
8. इसके बाद गुरु अर्जुन ने सभी गुरुओं की बानी और अन्य धर्मों के संतों के भजनों को संकलित कर एक ग्रंथ बनाया, जिसका नाम रखा 'ग्रंथसाहिब' और उसे हरमंदिर में स्थापित करवाया।
 
9. आध्यात्मिक जगत में गुरु अर्जुन देव जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। अपने पवित्र वचनों से दुनिया को उपदेश देने वाले गुरु जी का मात्र 43 वर्ष का जीवनकाल अत्यंत प्रेरणादायी रहा। अपने जीवन काल में उन्होंने धर्म के नाम पर आडंबरों और अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया। 
 
10. गुरु अर्जुन देव जी ने 'तेरा कीआ मीठा लागे/ हरि नाम पदारथ नानक मागे' शबद का उच्चारण करते हुए सन्‌ 1606 में अमर शहीदी प्राप्त की। गुरु अर्जुन देव जी सही मायनों में शहीदों के सिरताज एवं शांति के पुंज थे। 
 
- राजश्री कासलीवाल

ALSO READ: गुरु तेग बहादुर जयंती 2023, जान दे दी लेकिन झुके नहीं

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जानिए 3 रहस्यमयी बातें: कब से हो रही है शुरू गुप्त नवरात्रि और इसका महत्व

खरमास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, जानिए विवाह और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

सावधान! सच होने वाली है भविष्यवाणी, शनि के कारण कई देशों का बदलने वाला है भूगोल, भयानक होगा युद्ध?

सभी देखें

धर्म संसार

21 January Birthday: आपको 21 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 जनवरी 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

नर्मदा जयंती 2026: कब है, क्यों मनाई जाती है और क्या है इसका धार्मिक महत्व?

27 साल बाद शनि का नक्षत्र परिवर्तन: 17 मई तक किन राशियों को होगा बड़ा लाभ और किसे झेलना पड़ेगा नुकसान?

अगला लेख