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शकील बदायूनी
ग़म से कहाँ ऎ इश्क़ मफ़र है रात कटी तो सुबहा का डर है
जाँ निसार अख़्तर की नज़्म 'एहसास'
मैं कोई शे'र न भूले से कहूँगा तुझ पर फ़ायदा क्या जो मुकम्मल तेरी तहसीन न हो कैसे अल्फ़ाज़ के साँचे मे
ग़ज़ल में तसव्वुफ़ (भक्ति भाव)
जब यार देखा नयन भर दिल की गई चिंता उतर ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर
मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त
आप ये न समझना के मैं नाराज़ हो गया हूँ और अब कभी नहीं आऊँगा। आप जब चाहें मुझे याद कर सकते हैं। आप जब...
नश्तर इन्दौरी
मैं तो समझ गया मेरे क़ातिल की आरज़ू ऎ काश वो समझ ले मेरे दिल की आरज़ू
नज़्म 'बलूग़त' (वयस्क)
मेरी नज़्म मुझसे बहुत छोटी थी खेलती रहती थी पेहरों आग़ोश में मेरी आधे अधूरे मिसरे मेरे गले में बाँहें...
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
हर एक रास्ता मंज़िल है चल सको तो चलो बने बनाए हैं सांचे जो ढल सको तो चलो
ग़ालिब की ग़ज़ल और अशआर के मतलब
बेकल उत्साही की ग़ज़ल
रुबाइयाँ : मेहबूब राही
हर बात पे इक अपनी सी कर जाऊँगा जिस राह से चाहूँगा गुज़र जाऊँगा जीना हो तो मैं मौत को देदूँगा शिकस्त ...
आसिफ़ अली बहादुर - इन्दौर
गरदिश-ए-वक़्त के तूफ़ान से हारा तो नहीं मैंने मुश्किल में किसी को भी पुकारा तो नहीं
'अज़ीज़ अंसारी की ग़ज़ल'
सिकन्दर हमीद इरफ़ान की शायरी
ग़ालिब का ख़त-35
मेंह का यह आलम है कि जिधर देखिए, उधर दरिया है। आफ़ताब का नज़र आना बर्क़ का चमकना है, यानी गाहे दिखाई...
ग़ालिब का ख़त-34
ग़ालिब का ख़त-32
हाय-हाय वह नेक बख़्त न बची। वाक़ई यह कि तुम पर और उसकी सास पर क्या गुज़री होगी। लड़की तो जानती ही न ...
ग़ालिब का ख़त-31
आप से बात करेंगे कभी तन्हाई में
बेख़्याली का बड़ा हाथ है रुसवाई में आप से बात करेंगे कभी तन्हाई में
नज़्म : 'तख़लीक़'
मरमरीं ताक़ में दीपक रख कर, तेरी आँखों को बनाया होगा सुर्मा-ए-च्श्म की ख़ातिर उसने, फिर कोई तूर जलाया
मैं अक्सर चाँद पर जाता हूँ
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