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Budh Pradosh 2026: बुध प्रदोष व्रत कब और कैसे किया जाता है, जानें पूजन के शुभ मुहूर्त और लाभ

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
बुधवार, 15 अप्रैल 2026 (10:01 IST)
Pradosh Vrat Kab Hai: बुध प्रदोष व्रत के दिन लोग अपने घर में या मंदिर में जाकर शिवलिंग का पूजन करते हैं और इसके साथ-साथ ध्यान, मंत्र जाप और फलाहार का पालन करते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से बुद्धि में सुधार, करियर में प्रगति और व्यापार में सफलता मिलती है। इस दिन विशेष रूप से बेलपत्र, दूध और जल का प्रयोग पूजन में किया जाता है। इस बार बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार को किया जा रहा है तथा इस प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।ALSO READ: देवी कुब्जिका जयंती: तंत्र साधना और वक्रेश्वरी की महिमा का महापर्व
 
  • बुध प्रदोष व्रत पूजन के शुभ मुहूर्त 
  • बुध प्रदोष व्रत क्या है?
  • बुध प्रदोष व्रत कब होता है?
  • बुध प्रदोष व्रत कैसे करें?
  • बुध प्रदोष व्रत का महत्व और लाभ
 

आइए यहां जानते हैं बुध प्रदोष व्रत के बारे में...

बुध प्रदोष व्रत क्या है?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने के त्रयोदशी यानि 13वीं तिथि को किया जाता है। जब यह व्रत बुधवार को पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। इसे भगवान शिव को समर्पित व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से रोग निवारण, मानसिक शांति और व्यापारिक लाभ के लिए किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को खुश करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

बुध प्रदोष व्रत कब होता है?

यह व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को बुधवार के दिन पड़ने पर किया जाता है। ज्योतिषीय अनुसार, प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 1.5 घंटे पहले और 1.5 घंटे बाद का समय होता है। आज प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और मानसिक शांति प्राप्त होती है। 

 

बुध प्रदोष व्रत पूजन के शुभ मुहूर्त 

बुध प्रदोष व्रत तिथि: 15 अप्रैल 2026, बुधवार
त्रयोदशी तिथि पर पूजन का समय 06:47 पी एम से 09:00 पी एम
कुल अवधि : 02 घंटे 14 मिनट्स
वैशाख, कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 15 अप्रैल को 12:12 ए एम, 
त्रयोदशी का समापन- 15 अप्रैल 10:31 पी एम पर।
 

बुध प्रदोष व्रत कैसे करें?

- सुबह या प्रदोष काल से पहले स्नान करें।
- साफ और शुद्ध कपड़े पहनें।
- शिवलिंग या घर में पूजा स्थल को साफ करें।
- बेलपत्र, पुष्प और धूप का प्रबंध करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल चढ़ाएँ।
- बेलपत्र, लाल फूल और पंचामृत का उपयोग करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
- भगवान गणेश और माता पार्वती का भी स्मरण करें।
- व्रती को एक समय का भोजन या निर्जला व्रत रखना चाहिए।
- हल्का भोजन लें जैसे फल, दूध, कद्दू या लड्डू।
- इस दिन दाल, चावल, वस्त्र, धन या फल जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत शुभ है।
- शाम को शिवजी की आरती करें।
- भजन और कीर्तन से वातावरण शुद्ध होता है।

 

बुध प्रदोष व्रत का महत्व और लाभ

1. रोग और मानसिक परेशानी दूर होती है।
 
2. वाणी में मिठास और मन में शांति आती है।
 
3. व्यवसाय और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
 
4. व्रत करने से पितृ दोष और वास्तु दोष नष्ट होते हैं।
 
5. भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: बुध प्रदोष व्रत: बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता के लिए रखें व्रत

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