Publish Date: Mon, 13 Apr 2026 (17:10 IST)
Updated Date: Mon, 13 Apr 2026 (17:13 IST)
Baisakhi Sikh religious festival: वैसाखी का इतिहास सिख धर्म और पंजाबी संस्कृति में गहरा है। 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस अवसर पर सिख समुदाय अपने धर्म और साहस के प्रतीक को याद करता है। सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि यह त्योहार किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फसल कटाई का उत्सव है। इस दिन किसान अपनी मेहनत का फल पाते हैं और भगवान का धन्यवाद करते हैं। साल 2026 में वैशाखी का यह पर्व 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जा रहा है।
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वैशाखी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिन्दी पंचांग कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष वैशाखी का विवरण निम्नलिखित है:
तारीख: 14 अप्रैल, 2026 (मंगलवार)
वैशाखी संक्रांति क्षण: सुबह 09:39 बजे
एक सांस्कृतिक और कृषि उत्सव का महत्व
यह दिन सौर नव वर्ष की शुरुआत और मेष संक्रांति का प्रतीक है। पंजाब के किसानों के लिए वैशाखी 'रबी' की फसल (खासकर गेहूं) पकने की खुशी का दिन है। सुनहरे खेतों को देखकर किसान परमात्मा का शुक्रिया अदा करते हैं। ढोल की थाप पर किसान भाई 'भांगड़ा' और महिलाएं 'गिद्दा' डालकर अपनी खुशी का इजहार करती हैं। गांवों और शहरों में रंग-बिरंगे मेले लगते हैं, जहां कुश्ती/ दंगल, पारंपरिक खेल और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी होती है।
भांगड़ा और गिद्दा: वैशाखी मेले
खालसा पंथ की स्थापना: एक ऐतिहासिक मोड़: सिख समुदाय के लिए वैशाखी का धार्मिक महत्व सबसे गहरा है। 13 अप्रैल, 1699 को आनंदपुर साहिब में सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी।
पंज प्यारे: गुरु साहिब ने पांच साहसी स्वयंसेवकों को 'अमृत' चखाकर 'पंज प्यारे' के रूप में चुना।
समानता का संदेश: उन्होंने ऊंच-नीच और जाति-पाति को खत्म कर सभी पुरुषों को 'सिंह' और महिलाओं को 'कौर' की उपाधि दी।
निशान साहिब: इस दिन गुरुद्वारों में 'निशान साहिब' यानी सिख ध्वज को बदला जाता है और चोला साहिब की सेवा की जाती है।
उत्सव के रंग और व्यंजन
वैशाखी का जश्न बिना स्वादिष्ट पंजाबी भोजन के अधूरा है। इस दिन घरों और गुरुद्वारों में मुख्य व्यंजन बनाकर विशेष लंगर का आयोजन होता है।
कड़ा प्रसाद: शुद्ध देसी घी और आटे का हलवा, जो गुरुद्वारे में मुख्य प्रसाद होता है।
मीठे चावल: केसर और सूखे मेवों से बने पीले चावल, जो वसंत का प्रतीक हैं।
पिंडी छोले और भटूरे: उत्सव के दौरान खाया जाने वाला लोकप्रिय चटपटा भोजन।
मक्के की रोटी और सरसों का साग: पंजाब का पारंपरिक और सबसे प्रिय भोजन।
कैसे मनाएं वैशाखी 2026?
पहनावा: पहनावे में पारंपरिक पंजाबी सूट या धोती-कुर्ता पहनें।
नगर कीर्तन: सड़कों पर निकलने वाले धार्मिक जुलूसों या नगर कीर्तन में शामिल हों, जहां 'गतका' यानी सिख युद्ध कला के जौहर दिखाए जाते हैं।
सेवा: गुरुद्वारे जाकर 'लंगर' सेवा या जोड़ों/ जूतों की सेवा करें।
दान: अपनी फसल या कमाई का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को दान कर 'वंड छकना' की परंपरा निभाएं।
'वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह!'
वैशाखी 2026 आप सभी के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
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