rashifal-2026

कश्मीर: इस्लामिक स्टेट के नए वीडियो के मायने क्या है?

Webdunia
गुरुवार, 28 दिसंबर 2017 (11:44 IST)
शाइस्ता फ़ारूक़ी (बीबीसी मॉनिटरिंग)
तथाकथित चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रति निष्ठा ज़ाहिर करते हुए कश्मीरी चरमपंथियों से 'ख़िलाफ़त' के साथ आने की अपील करने वाला वीडियो कश्मीर घाटी, भारतीय या पाकिस्तानी मीडिया में रूचि पैदा करने में नाकाम ही रहा है।
 
25 दिसंबर को इस्लामिक स्टेट से जुड़े नाशिर न्यूज़ नेटवर्क ने चैट ऐप टेलीग्राम पर ये वीडियो जारी किया था। 13 मिनट 46 सेकंड का ये वीडियो #विलायतकश्मीर हैशटैग के साथ जारी किया गया है। इसमें अबु अल बारा अल कश्मीरी नाम के एक संदिग्ध चरमपंथी इस्लामिक स्टेट के प्रति अपनी निष्ठा का ऐलान कर रहे हैं और कश्मीर में सक्रिय अन्य चरमपंथियों से ऐसा ही करने की अपील कर रहे हैं।
 
भारत और पाकिस्तान के मीडिया ने इस वीडियो पर सीमित रिपोर्टिंग करते हुए सिर्फ़ वही तथ्य सामने रखे हैं जो पहले से ही लोगों को पता हैं। बहुत मुमकिन है कि अगले कुछ दिनों में इस पर टिप्पणियां भी प्रकाशित या प्रसारित की जाएं।
 
ऐसा भी संभव है कि इस्लामिक स्टेट इस क्षेत्र में अपनी नई शाखा की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन स्थानीय मीडिया में इस वीडियो पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आना यह बताता है कि यहां अभी आम धारणा यही है कि ये समूह अभी कश्मीर में सक्रिय नहीं है।
 
इस साल कश्मीर घाटी में हुए कुछ सरकार विरोधी प्रदर्शनों में ज़रूर इस्लामिक स्टेट के झंडे दिखे थे लेकिन प्रशासन ने अभी तक यहां इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी से इनकार ही किया है। लेकिन ये नया वीडियो पिछले छह महीने के दौरान कश्मीर को ध्यान में रखकर इस्लामिक स्टेट की ओर से ज़ारी किए गए कई वीडियों की कड़ी में ही एक वीडियो है।
 
कश्मीर में बढ़ते आईएस के संदेश
इस्लामिक स्टेट भारत प्रशासित कश्मीर में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और अशांति का फ़ायदा उठाने की कोशिशें कर रहा है। इसी साल जून में इस्लामिक स्टेट की पत्रिका रूमैया का पहला उर्दू संस्करण शुरू हुआ था जिसके ज़रिए कश्मीरियों से इस्लामिक स्टेट से जुड़ने का आह्वान किया था।
 
इसके एक महीने बाद ही टेलीग्राम पर इस्लामिक स्टेट का समर्थन करने वाले एक चैनल ने एक बयान प्रसारित किया था। ये बयान पहले अंसारुल खिलाफ़त जम्मू कश्मीर (एकेजेके) नाम के चैनल से प्रसारित किया गया था। इसमें कश्मीर में मौजूद इस्लामिक स्टेट के सभी समर्थकों से एक बैनर के तले आने की अपील की गई थी।
 
इसी महीने अल क़ायदा समर्थक एक मीडिया नेटवर्क ने कमांडर ज़ाकिर मूसा के नेतृत्व अंसार गज़वा-उल-हिंद नाम का समूह स्थापित करने का आह्वान किया। लेकिन स्थानीय अलगाववादियों और चरमपंथी नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वो कश्मीर की आज़ादी के लिए काम कर रहे हैं और उनका कोई वैश्विक एजेंडा नहीं है।
 
यही नहीं अलगाववादी और चरमपंथी नेताओं ने कश्मीर में अल-क़ायदा या इस्लामिक स्टेट की कोई भूमिका होने से इनकार भी किया।
 
ध्यान देने वाली बात ये है कि हाल में रिलीज़ हुए इस वीडियो में अंसार-ग़ज़वा-उल-हिंद से भी इस्लामिक स्टेट के साथ जुड़ने का आह्वान किया गया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ इस्लामिक स्टेट और अल-क़ायदा दोनों ही कश्मीर में अपनी जड़े जमाने की कोशिशें कर रहे हैं।
 
नवंबर में इस्लामिक स्टेट ने कश्मीर घाटी में अपना पहला हमला करने का दावा भी किया था। श्रीनगर शहर के ज़ाकुरा इलाक़े में एक कार में सवार तीन चरमपंथियों ने पुलिस पर गोलीबारी की थी जिसमें एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी और एक अन्य घायल हो गए थे।
 
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ गोलीबारी में एक चरमपंथी की भी मौत हुई थी जिसकी बाद में इस्लामिक स्टेट के झंडों की तस्वीरें आई थी। हालांकि इस्लामिक स्टेट के मीडिया संस्थान अमाक़ ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय पुलिसकर्मियों को पाकिस्तानी बताया था। इसके बाद इस्लामिक स्टेट के दावे पर सवाल उठे थे।
 
इसके बाद नवंबर में ही टेलीग्राम पर पोस्ट संदेशों में कश्मीर घाटी में पुलिसकर्मियों पर हमले करने का आह्वान किया गया था। तीन दिसंबर को पोस्ट एक संदेश में भारत में दूसरे धर्मों को मानने वालों पर हमले करने का आह्वान किया गया था।
 
इस्लामिक स्टेट के संदेशों में कश्मीर को ले कर भारत और पाकिस्तान दोनों की आलोचना भी की जाती रही है।
 
1 दिसंबर को टेलीग्राम पर जारी एक संदेश में कश्मीरियों से भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ और पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के एजेंटों को झूठ में न आने की सलाह भी दी गई थी और कहा गया था कि इनके एजेंट जहां भी हैं वहां उनकी हत्याएं की जानी चाहिए।
 
इस संदेश में कश्मीरियों से ख़िलाफ़त के बैनर तले आने के लिए भी कहा गया था।
 
इस्लामिक स्टेट के दावों पर चिंता
इन घटनाक्रमों के बाद ये चिंता भी पैदा हुई है कि इस्लामिक स्टेट कश्मीर घाटी में अपने पैर जमा सकता है। अक्तूबर में भारतीय सेना के एक अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि कश्मीर घाटी में इस्लामिक स्टेट के झंड़े फहराया जाना गहरी चिंता का विषय है और इससे कश्मीर में अलगाव महसूस कर रहे युवा प्रभावित हो सकते हैं।
 
अगस्त में भारतीय अख़बार मिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि साल 2019 तक कश्मीर में चरमपंथ और उग्र हो सकता है। अज्ञात ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से अख़बार ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट कश्मीर में पैर पसार चुका है और अगले एक दो सालों में कश्मीर में चरमपंथी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल सकते हैं। ये चरमपंथी समूह कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण भी कर सकते हैं।
 
ख़ारिज की इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी
लेकिन 19 दिसंबर को श्रीनगर स्थित अख़बार कश्मीर ऑब्ज़र्वर ने स्वतंत्र टिप्पणीकार इशफ़ाक़ जमाल का लेख प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए कश्मीर में जगह बनाना आसान नहीं होगा।
 
जमाल का तर्क था कि कश्मीर की स्थिति अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया, यमन या लीबिया से अलग है। उन्होंने इस तर्क को भी खारिज किया था कि पाकिस्तानी खु़फ़िया एजेंसी कश्मीर में आईएस को बढ़ावा दे रही है।
 
जमाल का मानना है कि ऐसे संगठन कश्मीर में सिर्फ़ कुछ दर्जन युवाओं को ही आकर्षित कर सकते हैं। उन्होंने लिखा, "पाकिस्तान, उसकी सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई अपनी ओर से ऐसे संगठन को संचालित नहीं होने देंगी क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का स्टैंड प्रभावित होगा।"
 
भारतीय अधिकारियों ने भी कश्मीर में इस्लामिक स्टेट की वास्तविक मौजूदगी की बातों से इनकार किया है। 20 नवंबर को भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि "कोई भी भारतीय मुसलमान जो इस्लाम में यकीन रखता है वो इस्लामिक स्टेट को इस देश में अपने पैर जमाने का कोई मौका नहीं देगा।"
 
भारत प्रशासित कश्मीर की पुलिस भी राजनाथ सिंह के बयान से सहमत है। कश्मीर के पुलिस प्रमुख एसपी वैद्य ने कहा था, "मुझे नहीं लगता कि यहां आईएस की कोई मौज़ूदगी है। किसी पर भी काला झंडा फेंक देना और इस्लामिक स्टेट के होने का दावा करना आसान है, लेकिय ये हकीकत नहीं।"

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

पप्पू यादव को कोर्ट से बड़ा झटका, पुलिस ने किया गिरफ्तार, जानिए क्या है मामला...

गद्दार और कब्र खुदेगी बयान, PM Narendra Modi ने Congress को घेरा तो क्या बोले राहुल गांधी

क्या है SIR की 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (Logical Discrepancy) और ममता बनर्जी का इस पर विरोध क्यों है?

अमेरिका से ट्रेड डील पर साइन नहीं,पीएम मोदी ने ट्रंप को क्यों दिया धन्वाद: यशवंत सिन्हा

पीएम मोदी पर हमला हो सकता था... मनोज तिवारी का बड़ा दावा, विपक्षी महिला सांसदों पर लगाए गंभीर आरोप

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

samsung Unpacked 2026 : S26 अल्ट्रा समेत ये 5 बड़े डिवाइस होंगे लॉन्च, जानें क्या है खास

Realme P4 Power 5G भारत में लॉन्च, 10,001 mAh की 'मॉन्स्टर' बैटरी और 6500 निट्स ब्राइटनेस के साथ मचाएगा तहलका

redmi note 15 pro 5g: 200MP कैमरा, 45W फास्ट चार्जिंग और 6580mAh की बैटरी, 3000 का कैशबैक ऑफर, जानिए क्या है कीमत

Apple iPhone 17e : सस्ते iPhone की वापसी, एपल के सबसे किफायती मॉडल के चर्चे

Vivo X200T : MediaTek Dimensity 9400+ और ZEISS कैमरे वाला वीवो का धांसू स्मार्टफोन, जानिए क्या रहेगी कीमत

अगला लेख