Festival Posters

छत्तीसगढ़ गठन के बाद महासमुंद में मिली थी भाजपा को पहली सफलता

Webdunia
शुक्रवार, 16 नवंबर 2018 (17:37 IST)
महासमुंद। समाजवादियों एवं कांग्रेस के दबदबे वाले छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में राज्य के अस्तित्व में आने के बाद 2003 में हुए पहले चुनावों में भाजपा को पहली बार सफलता हासिल हुई थी।
 
महासमुंद विधानसभा बनने के बाद काफी समय तक कांग्रेस के कब्जे में ही रहा। 2003 में यहां के पहले भाजपा विधायक पूनम चन्द्राकर हुए। पहले महासमुंद विधानसभा में खल्लारी, बसना, सरायपाली भी शामिल था। 1950 में महासमुंद विधानसभा बना और इसके 17 साल बाद खल्लारी, बसना तथा सरायपाली को विधानसभा का दर्जा मिला। खल्लारी, बसना और सरायपाली 1977 में विधानसभा के रूप में अस्तित्व में आए।
 
महासमुंद में 1950 में हुए विधानसभा चुनाव में प्राणनाथ गाड़ा (समाजवादी), 1955 में मदनलाल बागड़ी समाजवादी, 1960 में अयोध्या प्रसाद शर्मा समाजवादी, 1965 में नेमीचंद माल नेशनल कांग्रेस से जीतकर विधायक बने।
 
महासमुंद विधानसभा से 1970 में समाजवादी पुरुषोत्तमलाल कौशिक, 1975 में याकूब राजवानी, 1980 में कांग्रेस से मकसूदन लाल चन्द्राकर, 1985 में एक बार फिर मकसूदन लाल चन्द्राकर, 1990 में दाऊ संतोष अग्रवाल, 1993 में कांग्रेस से अग्नि चन्द्राकर, 1998 में पुन: अग्नि चन्द्राकर विधायक बने। वर्ष 2008 में फिर से नेशनल कांग्रेस से अग्नि चन्द्राकर विधायक बने और फिर वर्ष 2013 के चुनाव में निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे डॉ. विमल चोपड़ा यहां के विधायक बने।
 
खल्लारी विधानसभा के अस्तित्व में आने के बाद यहां पहला विधानसभा का चुनाव 1977 में हुआ और डॉ. रमेश जनता पार्टी से विधायक बने। सन् 1980 के चुनाव में लक्ष्मीनारायण इंदुरिया कांग्रेस से खल्लारी के पहले विधायक हुए। इसके बाद 1985 में लक्ष्मीनारायण इंदुरिया पुन: विधायक के रूप में यहां काबिज हुए और 1990 में डॉ. रमेश जनता दल से विधायक बने।
 
वर्ष 1993 और 1998 में भेखराम साहू 2 बार कांग्रेस से विधायक रहे। वर्ष 1999 के उपचुनाव में जनता दल से परेश बागबाहरा भाजपा से विधायक बने और 2003 के चुनाव में प्रीतम सिंग दीवान भाजपा से विधायक बने। वर्ष 2008 में परेश बागबाहरा कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़े और उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन 2013 में चुन्नीलाल साहू भाजपा के विधायक बने।
 
बसना विधानसभा में 1977 में पहला विधायक बीएस लालबहादुर कांग्रेस के पहले विधायक बने और 1980 में वे कांग्रेस पार्टी में रहकर दुबारा विधायक बने। वर्ष 1985 में यहां से महेन्द्र बहादुर कांग्रेस से विधायक बने। वर्ष 1990 में लक्ष्मण जयदेव सतपथी जनता दल से विधायक हुए।
 
1993 में महेन्द्र बहादुर निर्दलीय के रूप में जीते और 1998 में फिर से महेन्द्र बहादुर कांग्रेस के विधायक बने। 2003 में बसना से डॉ. त्रिविक्रम भोई भाजपा के पहले विधायक बने। 2008 में फिर से कांग्रेस की वापसी हुई और देवेन्द्र बहादुर कांग्रेस के विधायक बने। वर्ष 2013 में रूपकुमारी चौधरी भाजपा के बैनर तले विधायक बनीं।
 
इसी तरह सरायपाली विधानसभा क्षेत्र का पहला विधानसभा चुनाव 1977 में हुआ, जहां से मोहनलाल रामप्रसाद कांग्रेस पार्टी का बाना लेकर विधायक बने। वर्ष 1980 में कांग्रेस के ही मोहनलाल रामप्रसाद, 1985 में पुखराज सिंह निर्दलीय, 1990 में भाजपा के नरसिंग प्रधान, वर्ष 1993 में मोहनलाल चौधरी कांग्रेस, 1998 में देवेन्द्र बहादुर कांग्रेस, 2003 में त्रिलोचन पटेल भाजपा, 2008 में हरिदास भारद्वाज कांग्रेस और 2013 में रामलाल चौहान भाजपा के विधायक हुए। (वार्ता)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

Donald Trump को भारत के आगे क्यों झुकना पड़ा, क्या है टैरिफ घटाने की वजह, रूस ने कहा- नहीं मिला कोई मैसेज

कराची में धुरंधर के रहमान डकैत का बेटा जिब्रान गिरफ्तार, बाप ल्‍यारी का डॉन था, बेटे के ये थे काले कारनामे

राहुल गांधी दोहरा रवैया दिखाते हैं, India-US Trade Deal से देशवासियों का इंतजार खत्म, बोले पीयूष गोयल

LokSabha : कागज उछालने वाले 8 सांसद निलंबित, हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित, राहुल-प्रियंका का परिसर में प्रदर्शन

Next PM after Modi:नरेंद्र मोदी के बाद पीएम कुर्सी की जंग अब सिर्फ 2 लोगों के बीच

सभी देखें

नवीनतम

India-US Trade Deal : Donald Trump को भारत के आगे क्यों झुकना पड़ा, क्या है टैरिफ घटाने की वजह, रूस ने कहा- नहीं मिला कोई मैसेज

मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा हादसा, Air India और Indigo विमान के विंग्स टकराए

Myanmar में 5.9 तीव्रता का जोरदार भूकंप, कोलकाता में झटके

UP Police Constable Exam Date 2026 : यूपी कांस्टेबल परीक्षा की तारीख का ऐलान

भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी से UP को मिलेगी नई उड़ान

अगला लेख