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Ground Report : PNG में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, फिर भी जीती Corona से जंग

डॉ. रमेश रावत
शनिवार, 27 जून 2020 (08:25 IST)
कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण का पहला मामला सामने आने के साथ ही पापुआ ‍न्यू गिनी (PNG) की सरकार हरकत में आ गई एवं आपातकाल की घोषणा, सख्ती से लॉकडाउन (Lockdown) एवं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सील करने सहित कई कारगर कदम उठाए। यही कारण था कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ नहीं होने के बावजूद पीएनजी में कोरोना संक्रमण के मामले नहीं के बराबर हैं। यहां कुल 11 लोग संक्रमित हुए हैं, उनमें 8 पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। पापुआ न्यू गिनी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता के पद पर कार्यरत डॉ. आशीष कुमार लुहाच ने वेबदुनिया से बातचीत में बताया कि किस तरह यहां कोरोना महामारी से निपटा गया एवं इसका देश पर क्या असर हुआ है। 
 
लुहाच बताते हैं कि रिसर्च में रुचि होने के कारण कोरोना के दौरान उन्होंने अपना समय शोध पत्र लेखन में लगाया एवं कोविड-19 पर एक शोध पत्र लिखा, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशन के लिए भेजा है। इसके साथ ही पाक कला सीखने में भी अपना वक्त बिताया। पीएनजी यूनिटेक एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय है। कोविड-19 के चलते विवि ने कनवोकेशन सेरेमनी भी स्थगित कर दी है। यहां क्रिकेट काउंसिल ने भी मैच रद्द कर दिए हैं एवं अन्य खेलों पर भी इसका असर पड़ा है।
 
आरंभ में लॉकडाउन के दौरान आवास क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन नहीं किया जा सका। हालांकि दूसरे चरण में इंटरनेट उपलब्ध हो गया एवं शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य हो गईं। पीएनजी में कोरोना संक्रमण के मामले बहुत कम थे। इसके बाद भी कोरोना को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने लॉकडाउन किया। यहां सरकार ने मुख्य रूप से व्यक्तिगत स्वच्छता पर फोकस किया। वहीं, अनावश्यक खर्चों से बचने के लिए चर्च सहित सार्वजनिक समारोह में शामिल होने संबंधी भी गाइड लाइन जारी की गई। सीमा पर सब्जी बाजारों एवं दुकानों को बंद करने के कारण खाद्य आपूर्ति कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी। 
 
चीनी नागरिक को मारकर खाने की अफवाह : मीडिया ने यहां के प्रधानमंत्री की ओर से राष्ट्र के नाम संबोधन को लाइव दिखाया। आरंभ में सरकार की ओर से नामित अधिकारी दिन में दो बार राष्ट्र को संबोधित करते थे। यहां फेक न्यूज भी देखने को मिलीं। एक फेक न्यूज कुछ इस तरह थी- 'स्थानीय आदिवासी लोगों ने यहां पर एक चीनी नागरिक को मार दिया। यह चीनी नागरिक कोरोना से संक्रमित था। बाद में वे इसे खा गए। इस कारण उस गावं में रहने वाले सभी वयस्क कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए।'  
पीएनजी कोरोना मुक्त : प्रधानमंत्री ने सीमाओं को सील कर एवं अंतरप्रांतीय यात्राओं को प्रतिबंधित कर कोविड-19 से निपटने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके लिए सरकार ने यहां पर पर्याप्त भोजन, पानी और बिजली की आपूर्ति की समुचित व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा।
 
वर्तमान में पीएनजी की गिनती उन देशों में हो गई है, जो लगभग कोरोना मुक्त हैं, लेकिन संक्रमण के खतरे से हम नहीं नकार सकते है। मेरा मानना है कि सरकार को यहां पर अभी सीमा खोलने में धैर्य रखना चाहिए और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करना चाहिए। हालांकि यहां आपातकालीन परीक्षण केन्द्र जैसी स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ नहीं हैं, बावजूद इसके कोरोना पर विजय पाई है।
 
लुहाच कहते हैं कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन से हुई है एवं इसे जानबूझकर विश्व में फैलाया गया। चीन ने पूरी दुनिया को धोखा दिया है। वहीं, भारत में समय रहते कोरोना से निपटने के प्रयास किए गए। पीएनजी में सार्वजनिक स्थानों को खोल दिया गया है। आपातकाल हटाने के बाद सभी प्रतिबंध यहां पर हटा दिए गए हैं। जनजीवन सामान्य हो रहा है। सीमाएं अभी भी सील हैं। 
 
क्लोरोक्वीन के साइड इफेक्ट : कोरोना संक्रमण के उपचार में क्लोरोक्वीन का उपयोग किया जा रहा है। क्लोरोक्वीन में फॉस्फेट व्यापक रूप से उपलब्ध है। इसके साइड इफेक्ट से भी नहीं नकारा जा सकता है। इसके उपयोग को लेकर चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी खुले रूप से चेतावनी दे रहे हैं कि इस दवाई का उपयोग सिरदर्द, दस्त, शरीर पर चकत्ते, खुजली एवं मांसपेशियों में दर्द सहित अनेक समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। 
गंभीरता से लें कोरोना को : मेरा आम जन से निवदेन है कि कोरोना वायरस को गंभीर रूप से लेते हुए इसके खतरे को समझें। यह नहीं सोचना चाहिए कि यह युवाओं को प्रभावित या संक्रमित नहीं करेगा। अनावश्यक घर से बाहर निकलने, लोगों के संपर्क में आने से एवं यात्रा करने से बचें। स्वच्छता एवं सुरक्षा के उपाय करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। 
 
पीएनजी, ताइवान एवं वियतनाम जैसे कम विकसित देशों की तर्ज पर कोरोना संक्रमण की स्थिति संभालने एवं इससे निपटने में कामयाब हुआ है एवं यहां अब जनजीवन सामान्य है। दूसरे विकसित एवं विकासशील देशों को इससे सीखना चाहिए। यदि ये कम विकसित देश इस महामारी से लड़कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं तो अन्य देश क्यों नहीं।
कौन है डॉ. आशीष कुमार लुहाच : डॉ. आशीष पापुआ न्यू गिनी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं। इनके 80 से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन हो चुका है। विभिन्न प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल में बतौर संपादक भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में विश्व के प्रतिष्ठित संस्थान आईईईई, सीएसआई, एसीएम एवं आईएसीएसआईटी के भी सदस्य हैं। 
 

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