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iran protests: यदि ईरान में हुआ तख्‍तापलट तो लागू होगा साइरस अकॉर्ड्स, जानें क्या है यह?

WD Feature Desk
गुरुवार, 15 जनवरी 2026 (16:49 IST)
iran protests conflict news: ईरान में संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर वैश्विक रणनीतिकारों की नज़रें क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी पर टिकी हैं। पहलवी ने न केवल घरेलू सुधारों का रोडमैप तैयार किया है, बल्कि एक क्रांतिकारी विदेश नीति का प्रस्ताव भी रखा है, जिसे 'साइरस अकॉर्ड्स' (Cyrus Accords) नाम दिया गया है। आखिर क्या है इस 'साइरस अकॉर्ड्स' के पीछे का मास्टरप्लान? आइए विस्तार से समझते हैं।
 
साइरस अकॉर्ड्स क्या है?
साइरस अकॉर्ड्स (Cyrus Accords) वर्तमान में (जनवरी 2026) अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य-पूर्व की राजनीति में एक उभरता हुआ शब्द है। सरल शब्दों में, साइरस अकॉर्ड्स अब्राहम अकॉर्ड्स का ही एक विस्तारित और भविष्यवादी रूप है, जिसका केंद्र इजराइल और एक "भावी लोकतांत्रिक ईरान" के बीच शांति स्थापित करना है।
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यह महज़ एक समझौता नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व के भविष्य को बदलने वाला एक प्रस्तावित विज़न है। इस कूटनीतिक रूपरेखा (Framework) की नींव ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने इजराइली और अमेरिकी रणनीतिकारों के साथ मिलकर रखी है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान में वर्तमान व्यवस्था के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन की स्थापना करना है।
 
एक नया क्षेत्रीय गठबंधन साइरस अकॉर्ड्स का लक्ष्य एक ऐसे ऐतिहासिक गठबंधन को जन्म देना है जिसमें एक स्वतंत्र ईरान, इजराइल और अरब देश एक साथ एक मंच पर होंगे। यह गठबंधन न केवल युद्धों को समाप्त करेगा, बल्कि आपसी सहयोग और विकास के एक नए युग का सूत्रपात करेगा।
 
ऊर्जा और अर्थव्यवस्था का कायाकल्प ईरान के भविष्य को लेकर इस अकॉर्ड्स में कुछ बड़े वादे किए गए हैं:-
भरोसेमंद ऊर्जा केंद्र: ईरान अपने विशाल तेल और गैस भंडारों के जरिए वैश्विक बाजार के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय सप्लायर बनेगा। यहाँ पारदर्शी नीतियां और स्थिर कीमतें "मुक्त विश्व" की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगी।
 
पारदर्शिता और सुधार: शासन के स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, आर्थिक नीतियों में पारदर्शिता और वैश्विक मानकों को अपनाना इस नए ईरान की प्राथमिकता होगी।
 
साइरस अकॉर्ड्स नाम ही क्यों?
साइरस अकॉर्ड्स प्राचीन 'साइरस द ग्रेट' के उस गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने की कोशिश है, जहां ईरान (फारस) और उसके पड़ोसी देशों के बीच दुश्मनी नहीं, बल्कि गहरा सम्मान और सहयोग था। यह नाम प्राचीन फारसी सम्राट साइरस द ग्रेट (Cyrus the Great) के नाम पर रखा गया है। साइरस द ग्रेट ने ही प्राचीन काल में यहूदियों को बेबीलोन की कैद से मुक्त किया था और उन्हें यरूशलेम में अपना मंदिर फिर से बनाने की अनुमति दी थी।  यह नाम ईरान और यहूदियों के बीच ढाई हजार साल पुरानी दोस्ती और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
 
अब्राहम अकॉर्ड्स क्या है? 
इसे 'अब्राहम अकॉर्ड्स' इसलिए कहा जाता है क्योंकि अब्राहम (इब्राहिम) को यहूदी धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म- तीनों में एक प्रमुख और साझा पूर्वज माना जाता है। यह नाम इन धर्मों के बीच शांति और भाईचारे का प्रतीक है। 1948 में इजराइल के गठन के बाद से, 2020 तक केवल दो अरब देशों (मिस्र और जॉर्डन) के इजराइल के साथ शांति समझौते थे। अब्राहम अकॉर्ड्स ने इस गतिरोध को तोड़ा और इजराइल को अरब जगत में स्वीकार्यता दिलाई।
 
अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) मध्य पूर्व के इतिहास में एक ऐतिहासिक राजनयिक समझौता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह इजराइल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की एक पहल है। इसकी घोषणा अगस्त 2020 में हुई थी। 15 सितंबर 2020 को वाशिंगटन (अमेरिका) के व्हाइट हाउस में इस पर हस्ताक्षर किए गए। शुरुआत में इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन के बीच यह समझौता हुआ। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हो गए। इस समझौते में अमेरिका (तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन) ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
 
हालांकि इस समझौते से व्यापार और पर्यटन में बहुत वृद्धि हुई है, लेकिन अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इजराइल-हमास युद्ध के बाद से इन समझौतों को लेकर काफी तनाव और चुनौतियां पैदा हुई हैं। अरब देशों पर अपनी जनता का भारी दबाव है, जिससे इस समझौते की भविष्य की दिशा पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

Edited By: Anirudh Joshi

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