Hanuman Chalisa

Dhanteras 2025: धनतेरस पर शनि प्रदोष का महासंयोग, शिव कृपा से ये उपाय दिलाएंगे दोगुना लाभ

WD Feature Desk
मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025 (17:47 IST)
Shani Pradosh Vrat on Dhanteras: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व इस वर्ष एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग लेकर आया है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत का महासंयोग कहा जाता है। इस वर्ष यह पवित्र संयोग धनतेरस के दिन निर्मित हो रहा है, जिससे भक्तों को एक ही दिन में चार देवों का आशीर्वाद और दोगुना लाभ कमाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।

क्या है दुर्लभ संयोग का आध्यात्मिक महत्व: धनतेरस मुख्य रूप से मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। वहीं, शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। इन दोनों पावन तिथियों का एक साथ आना ज्योतिष शास्त्र में महासंयोग माना जाता है, जो भक्तों के जीवन में संतुलित समृद्धि लाता है:
1. धन-समृद्धि और ऐश्वर्य: मां लक्ष्मी और कुबेर की कृपा से धन आगमन के मार्ग खुलते हैं और आर्थिक संपन्नता आती है।
2. उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य: भगवान धन्वंतरि की पूजा से व्यक्ति रोग मुक्त होता है और जीवन में स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
3. कष्टों से मुक्ति और दोष निवारण: भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त कृपा से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य शनि दोषों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है, जिससे जीवन के बड़े कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दोगुना लाभ पाने के लिए करें ये चमत्कारी उपाय
इस दुर्लभ महासंयोग का अधिकतम लाभ उठाने के लिए भक्तों को शास्त्रों में बताए गए विशिष्ट उपाय प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अवश्य करने चाहिए:
  1. दीपदान: धनतेरस पर दीपदान की परंपरा यमराज को समर्पित है। इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार और आंगन में 13 दीपक जरूर जलाने चाहिए। एक दीपक यमराज के नाम से दक्षिण दिशा में भी रखें। यह उपाय अकाल मृत्यु के भय को टालता है और परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. शिव अभिषेक: प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक करें। उन्हें बेलपत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा और गंगाजल अर्पित करें। शिव दारिद्र्य दहन स्तोत्र का पाठ दरिद्रता दूर करने में विशेष फलदायी माना जाता है।
  3. शनिदेव को प्रसन्न करें: शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिदेव को काले तिल, उड़द दाल या तेल अर्पित करें। शनि मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का 108 बार जाप करने से शनि दोष और बाधाएं दूर होती हैं।ALSO READ: Dhanteras 2025: धनतेरस की रात करें ये चमत्कारी उपाए, मां लक्ष्मी की विशेष कृपा से हो जाएंगे मालामाल
    अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
     

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

कौन था मायावी कालनेमि? योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद क्यों छिड़ी है सनातन पर नई बहस?

धार की भोजशाला: जहाँ पत्थरों पर खुदी है 'संस्कृत' और दीवारों में कैद है परमारों का वैभव

नर्मदा परिक्रमा का क्या है महत्व, कितने दिन चलना पड़ता है पैदल

Video: यमुना नदी में कालिया नाग का अवतार? सोशल मीडिया पर वायरल दावे का जानिए पूरा सच

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

25 January Birthday: आपको 25 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 जनवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

भीष्म अष्टमी 2026: पितामह का निर्वाण दिवस, जानें इस दिन का महत्व

Weekly Rashifal 2026: साप्ताहिक राशिफल (26 जनवरी से 01 फरवरी 2026): जानिए इस सप्ताह आपके सितारे क्या कहते हैं!

नर्मदा की अनंत धारा: एक विद्धत चेतना का आह्वान

अगला लेख