Festival Posters

मोदी सरकार के मंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की फिर की मांग,सवाल संघ के एजेंडे को पूरा करेगी केंद्र सरकार?

विकास सिंह
सोमवार, 11 जुलाई 2022 (15:26 IST)
आज विश्व जनसंख्या दिवस है। दुनिया की आबादी आज आठ अरब के आंकड़े को पार कर गई है। जनसंख्या के मामले में भारत 1.35 अरब आबादी के साथ दुनिया में दूसरे स्थान पर है। भारत में बढ़ती जनसंख्या को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।

जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर लगातार मुखर रहने वाले मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरिराज सिंह ने फिर सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की है। गिरिराज सिंह ने ट्विट के जरिए जारी अपने बयान में कहा कि भारत में सुरसा की तरह जनसंख्या की गति बढ़ रही है। आज चीन में एक मिनट में 10 बच्चे और भारत में इसी समय में 30 बच्चे पैदा हो रहे है। ऐसे में जनसंख्या की ये बढ़ती गति एक कड़े कानून से ही रूक सकती है। यह कानून सभी धर्मों के लिए समान हो। इसलिए आज सड़क से लेकर संसद तक एक कड़े कानून के लिए आवाज उठनी चाहिए। 
 
कानून के लिए संसद में आ चुका है प्राइवेट बिल- भारत में लगातार बढ़ती आबादी के बीच जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग के बीच संसद में प्राइवेट बिल भी आ चुका है। संघ विचारक और सांसद राकेश सिन्हा दो बच्चों वाले कानून को लेकर प्राइवेट बिल पेश किया था जिस पर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कानून की जगह जागरूत और शिक्षा के जरिए जनसंख्या नियंत्रण की बात कही थी। 
 
सांसद राकेश सिन्हा ने अपने प्राइवेट बिल में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाकर दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को दंडित करने के साथ ही उनको सभी सरकारी लाभों से वंचित करने की बात कही थी। उन्होंने बढ़ती जनसंख्या को लेकर कहा था कि आज उत्तरी राज्यों और दक्षिण राज्यों में जनसंख्या को लेकर रीजनल असंतुलन पैदा हो रहा है उसके सामाजिक और अर्थिक असंतुलन पैदा होता है। 
 
कई राज्यों में भी उठ चुकी है मांग- देश की कई राज्य सरकारें जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर आगे बढ़ चुकी है। भाजपा शासित राज्यों असम, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर मांग लगातार तेज होती जा रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा दो बच्चों की नीति बनाने का एलान कर चुके है। 

वहीं उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सत्ता में वापस आने के बाद राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने केंद्र सरकार से जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की सिफारिश करने की तैयारी में है। वहीं मध्यप्रदेश में तो सत्तारूढ़ भाजपा की विधायक और मंत्री खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग कर चुके है।
जनसंख्या नियंत्रण संघ का प्रमुख एजेंडा-मोदी सकार जो अपने दूसरे कार्यकाल में संघ के एजेंडे को तेजी से पूरा करती हुई दिखाई दे रही है उसमें अब जनसंख्या नियंत्रण कानून पहली प्राथमिकता बनता दिखाई दे रहा है। छोटे परिवार के लिए शुरू से हिमायती रहा संघ जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर काफी मुखर रहा है। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल में जनसंख्या नीति को पुनर्निधारण कर नीति को सभी पर समान रुप से लागू करने का प्रस्ताव पहले ही पास कर चुकी है।
 
संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले ही कई मौकों पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए नई नीति बनाने पर साफ शब्दों में अपनी राय रख चुके हैं। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि आपके घर में कितने बच्चे हो यह राज्य तय करे। उन्होंने जनसंख्या नीति बनाने को लेकर राज्यों को विशेष भूमिका निभाने की बात कही है। संघ बढ़ती जनसंख्या को राष्ट्र के विकास और संप्रभुता के राह में एक बड़ा रोड़ा मानता रहा है।
 
जनसंख्या नियंत्रण कानून क्यों जरूरी?- जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर पीएमओ में प्रजेंटेशन होने के साथ-साथ सर्वोच्च अदालत में भी याचिका लग चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय जनसंख्या नियंत्रण कानून भारत के लिए क्यों जरूरी है इसको लेकर पीएमओ में अपना प्रजेंटेशन दे चुके है। 
 
वरिष्ठ वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि आज भारत की जनसंख्या चीन से अधिक हो गई है। वह कहते हैं कि वर्तमान समय में 124 करोड़ भारतीयों के पास आधार है, लगभग 20% नागरिक (विशेष रूप से बच्चे) बिना आधार के हैं तथा 5 करोड़ बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये अवैध रूप से भारत में रहते हैं।

इससे स्पष्ट हैं कि हमारे देश की जनसंख्या 135 करोड़ नहीं बल्कि 150 करोड़ से ज्यादा है और हम चीन से आगे निकल चुके हैं। इसके ठीक उलट अगर यदि संसाधनों की बात करें तो हमारे पास कृषि योग्य भूमि दुनिया की लगभग 2% और पीने योग्य पानी 4% है लेकिन जनसंख्या 20% है। यदि चीन से तुलना करें तो क्षेत्रफल चीन का लगभग एक तिहाई है लेकिन जनसंख्या वृद्धि की दर चीन की तीन गुना है। चीन में प्रति मिनट 11 बच्चे और भारत में प्रति मिनट 33 बच्चे पैदा होते हैं। ऐसे में बढ़ती जनसंख्या आज भारत के लिए चुनौती और कई समस्याओं की जड़ है। 
 
वेंकटचलैया आयोग ने की कानून की सिफारिश– जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए संविधान समीक्षा आयोग (वेंकटचलैया आयोग) ने संविधान में आर्टिकल 47A जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था। जिसे आजतक लागू नहीं किया गया। वेंकटचलैया आयोग ने 31 मार्च 2002 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी था। इसी आयोग के सुझाव पर मनरेगा, राईट टू एजुकेशन, राईट टू इनफार्मेशन और राईट टू फूड जैसे महत्वपूर्ण कानून बनाए गए लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में चर्चा भी नहीं हुई।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

कौन हैं तेजस्वी घोसालकर, मुंबई की संभावित मेयर जिन्होंने 2024 में पति अभिषेक की हत्या की त्रासदी झेली

Karnataka : क्या लक्कुंडी गांव में मिलेगा सोने का भंडार? 400 साल पुराने खजाने के रहस्य ने उड़ाए होश, खुदाई के लिए पहुंचा JCB और ट्रैक्टरों का काफिला

Lashkar E Taiba के कमांडर का कबूलनामा, हम वहां बैठ भी नहीं सकते, Pakistan को दर्द दे रहे Operation Sindoor से मिले घाव

bmc election results : महाराष्ट्र के BMC चुनाव में राज ठाकरे की हार, क्या उद्धव आगे देंगे भाई का साथ

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे ब्रांड का सूर्यास्त!, निकाय चुनाव में 40 साल बाद ढहा BMC का किला, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी बेअसर

सभी देखें

नवीनतम

Weather Update : पहाड़ों पर बर्फबारी ने बढ़ाई मैदानी इलाकों में मुश्‍किल, इन राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

Ladli Behna Yojana : 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में CM यादव ने ट्रांसफर किए 1500 रुपए, 206 करोड़ से अधिक के कार्यों का लोकार्पण

LIVE: बंगाल और असम के 2 दिवसीय दौरे पर पीएम मोदी, देंगे हजारों करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

तेल बाजारों के लिए कितने मायने रखता है ईरान का भविष्य?

Chabahar port : चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों की काली छाया, जानिए क्या कूटनीति अपनाएगा भारत

अगला लेख