Hanuman Chalisa

हिन्दू नववर्ष 2022 : कब से प्रचलन में आया विक्रम संवत

Webdunia
शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022 (17:00 IST)
Hindu New Year 2022: शनिवार, 2 अप्रैल 2022 से चैत्र माह की प्रतिपदा से भारत का नववर्ष प्रारंभ हो रहा है। इस दिन से विक्रम संवत् 2078 की समाप्ति और 2079 का प्रारंभ होगा। इसी दिन से नवरात्रि पर्व भी प्रारंभ होगा। इस बार के नव संवत्सर ना नाम 'नल' है। आओ जानते हैं कि कब से प्रचलन में आया विक्रम संवत।
 
 
- आज जिसे हम हिन्दू या भारतीय कैलेंडर कहते हैं, उसका प्रारंभ 57-58 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने किया था। विक्रमादित्य से पहले भी चैत्र मास की प्रतिपदा को नववर्ष मनाया जाता रहा है, लेकिन तब संपूर्ण भारत में कोई एक मान्य कैलेंडर नहीं था। 
 
- हालांकि इससे पूर्व भारत में कलियुग संवत् प्रचलन में था जिसकी शुरुआत 3102 ईसवी पूर्व में हुई थी। इस बीच कृष्ण और युधिष्‍ठिर के भी संवत् प्रचलन में थे। इससे भी पूर्व 6676 ईस्वी पूर्व से सप्तर्षि संवत् प्रचलन में था। शक संवत भी प्रचलन में था, लेकिन वह संपूर्ण भारत में मान्य नहीं था।
 
- सभी का आधार पंचांग और ज्योतिष की गणनाएं ही थीं। मान्य कैलेंडर के नाम पर पंचांग प्रचलन में था। संपूर्ण भारत में ज्योतिषीय गणना और पंचांग पर आधारित मंगल कार्य आदि संपन्न किए जाते थे। 
 
- इसके बाद उज्जयिनी सम्राट ‘चेष्टन’ के प्रयास से एक मान्य कैलेंडर अस्तित्व में आया। विक्रम संवत ईसा से लगभग 58 वर्ष पहले गर्दभिल्ल के पुत्र सम्राट विक्रमादित्य के प्रयास से वजूद में आया। शकों पर विजय प्राप्त करने के बाद तब के प्रचलित शक संवत के स्थान पर आक्रांताओं पर विजय स्तंभ के रूप में विक्रम संवत स्थापित हुआ। 
 
- आरंभ में विक्रम संवत को कृत संवत के नाम से जाना गया, कालांतर में मालव संवत के रूप में प्रख्यात हुआ। बाद में सुधारों को अंगीकार करते हुए विक्रम संवत में तब्दील हो गया। हिन्दू पंचांग और ज्योतिष के ग्रंथों पर आधारित सम्राट विक्रमादित्य ने एक सर्वमान्य कैलेंडर को ज्योतिषियों और खगोलविदों की सलाह से प्रचलन में लाया।

- अब सवाल यह उठता है कि नववर्ष को क्यों संवत्सर कहा जाता है? दरअसल, जिस तरह प्रत्येक माह के नाम नियुक्त हैं, जैसे चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन, उसी तरह प्रत्येक आने वाले वर्ष का एक नाम होता है। 12 माह के 1 काल को संवत्सर कहते हैं और हर संवत्सर का एक नाम होता है। इस तरह 60 संवत्सर होते हैं। 60 संवत्सरों में 20-20-20 के 3 हिस्से हैं जिनको ब्रह्माविंशति (1-20), विष्णुविंशति (21-40) और शिवविंशति (41-60) कहते हैं। वर्तमान में विक्रम संवत् 2079 से 'नल' नाम का संवत्सर प्रारंभ होगा। इसके पहले राक्षस संवत्सर चल रहा था।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Holi puja remedies 2026: होलिका दहन के दिन करें मात्र 5 उपाय, संपूर्ण वर्ष रहेगा शुभ

कब तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी? इस भविष्यवाणी ने उड़ाई सबकी नींद, जानें वो 3 बड़ी बातें

होली पर गुलाल गोटा की परंपरा कहां से आई? मुस्लिम कारीगरों से क्या है इसका रिश्ता

चंद्र ग्रहण के दिन भारत में कहां-कहां दिखेगा ग्रहण? जानिए पूरी लिस्ट

काशी में होली की अनोखी शुरुआत: मसान होली सहित जानिए 5 चौंकाने वाली परंपराएं

सभी देखें

धर्म संसार

Dhulandi 2026: धुलेंडी पर गमी वाले घर जाकर करें ये 3 कार्य तो होगी शुद्धि

Happy Holi Wishes 2026: रंगों के त्योहार होली पर अपनों को भेजें ये 10 सबसे मंगलकारी शुभकामनाएं

चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब तक होगा समाप्त, इसके बाद करें ये 3 कार्य

Dhulandi 2026: धुलेंडी के दिन 5 कार्य जरूर करें तो होगा बड़ा फायदा

काशी में होली की अनोखी शुरुआत: मसान होली सहित जानिए 5 चौंकाने वाली परंपराएं

अगला लेख