Publish Date: Fri, 20 Feb 2026 (15:11 IST)
Updated Date: Fri, 20 Feb 2026 (19:14 IST)
Gujarat News: गुजरात के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और अन्य उच्च पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा सुधार करते हुए महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। अब तक 'अध्यापक सहायक' के रूप में फिक्स वेतन (Fixed Pay) पर दी गई सेवा को उच्च पदों की भर्ती के लिए 'अनुभव' के रूप में नहीं गिना जाता था। इस पुराने नियम के कारण कई योग्य उम्मीदवार पात्रता होने के बावजूद आवेदन से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब सरकार ने निर्णय लिया है कि 5 साल के फिक्स वेतन वाले शैक्षणिक अनुभव को भी स्थायी भर्ती के लिए मान्य माना जाएगा।
यह नया नियम राज्य के सभी 14 मुख्य सरकारी विश्वविद्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में चल रही विसंगतियों को दूर कर समानता बनाए रखी जाए। पहले इस तरह का प्रावधान केवल कुछ विश्वविद्यालयों तक सीमित था, लेकिन अब सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के संदर्भ में दिए गए सुझावों के आधार पर इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है। इससे अब अनुभव की गणना में एकरूपता आएगी और चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होगी।
राज्य सरकार के इस फैसले से गुजरात यूनिवर्सिटी, एमएस यूनिवर्सिटी (बड़ौदा), हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात यूनिवर्सिटी, दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी सहित सभी प्रमुख संस्थानों के हजारों शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सुधार उन प्राध्यापकों के लिए संजीवनी साबित होगा जिन्होंने अपने करियर के शुरुआती कई वर्ष फिक्स वेतन पर काम करते हुए बिताए हैं। अब वे प्रोफेसर या रीडर जैसे उच्च पदों के लिए बेझिझक आवेदन कर सकेंगे।
शिक्षाविदों के अनुसार, यह निर्णय लंबे समय से संघर्ष कर रहे अध्यापक सहायकों के लिए न्यायपूर्ण है। अनुभव की गणना में फिक्स वेतन अवधि को शामिल करने से उच्च पदों पर अधिक अनुभवी और कुशल उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित होगा। इस ऐतिहासिक सुधार के परिणामस्वरूप, भविष्य में होने वाली विश्वविद्यालय भर्तियों में उम्मीदवारों की संख्या में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है, जो अंततः शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala