Hindi Poems 109
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मन आज फिर कंपकंपाया है
मन आज फिर कंपकंपाया है,खौफ की फाँस चुभती है,कल क्या होगा मेरा,क्या फिर से अमन की साँस ले पाऊँगा,एक व...
हवा, जो चंपा से बहकर आई
तुम, एक हवा जो चंपा से बहकर आई, तुम, एक धूप जो गुलमोहर से छनकर आई, तुम, एक नदी जो मेरी आँखों से छलछल...
मन चाहता है
मेरा मन चाहता है बस, तुम्हारा होना और एक तुम हो कि बस, मन से ही मेरे नहीं हुए। यही तो अंतर है तुममें...
मुझे हर रंग चाहिए
जिजीविषा
पलकों की झीनी झालर पर
ओ, ईद के सरल चाँद
ईद का एक चाँद था
आँखें नम रही और सारी दुआएँ उसके नाम कर दीं हर सहर इबादत की अपनी उम्र उसके नाम कर दीं कुछ आँसू थे और ...
...और हमारी ईद होगी
कुँवारा रेशम
मेरे मन की कच्ची किनारियों पर अब भी टँका है तुम्हारी नजरों के स्पर्श का लटकन सितारा, झरा दो उसे, कही...
तुम, एक कच्ची रेशम डोर
यादों की कोमल तितली
फाल्गुनी की तीन कविताएँ
चंचल छौने मेघ के
चंचल छौने मेघ के रचें नया इतिहास। आँखें मूँदे सूर्य की मिटे धरा की प्यास॥ चातक हर्षित हो रहे और विभो...
आँसुओं के पतझर में
ताना-बाना
सिसकियाँ शोर नहीं करती
प्रेम अपनी आँखों में सबका सपना
आँगन में जैसे खिली धूप हो
हरी चूड़ियाँ और पहाड़ी चिड़िया
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