Hanuman Chalisa

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता : टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

Webdunia
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
सत्य का संघर्ष सत्ता से,
न्याय लड़ता निरंकुशता से,
अँधेरे ने दी चुनौती है,
किरण अंतिम अस्त होती है।
 
दीप निष्ठा का लिए निष्कम्प,
वज्र टूटे या उठे भूकंप,
यह बराबर का नहीं है युद्ध,
हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
हर तरह के शस्त्र से है सज्ज,
और पशुबल हो उठा निर्लज्ज।
 
किंतु फिर भी जूझने का प्रण,
पुन: अंगद ने बढ़ाया चरण,
प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार,
समर्पण की माँग अस्वीकार।
 
दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते।
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
साभार : मेरी इक्यावन कविताएं
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

चेहरा पड़ गया है काला और बेजान? सर्दियों में त्वचा को मखमल जैसा कोमल बनाएंगे ये 6 जादुई टिप्स

Hair loss: बालों का झड़ना: कारण, डाइट चार्ट और असरदार घरेलू नुस्खे

ब्रेन एन्यूरिज़्म: समय पर पहचान और सही इलाज से बच सकती है जान, जानें एक्सपर्ट की राय

Health tips: स्वस्थ जीवन के लिए 10 सरल और असरदार उपाय

Work From Home: घर में इस दिशा में बैठकर करेंगे काम, तो करियर में मिलेगी दोगुनी तरक्की

सभी देखें

नवीनतम

Clock Direction: घड़ी लगाने की सही दिशा बदल देगी आपका 'बुरा समय', आज ही चेक करें अपना घर

Valentine Day Essay: वेलेंटाइन डे पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

प्रेरक कविता: तुम कमजोर नहीं हो

इन 10 तरह के लोगों से कभी उम्मीद न रखें, वरना जीवन में मिलेगा सिर्फ दुख

हिन्दी कविता: फूल पलाश के...

अगला लेख