khatu shyam baba

हिन्दी कविता : दहेजी दानव

डॉ. प्रमोद सोनवानी 'पुष्प'
दहेजी दानव ने बगराया
भारी भष्टाचार जी 
इस दानव को मार भगाओ
है जन-जन का भार जी 
 
पुत्र जन्म लेते ही घर में
लहर खुशी की छा जाती
बेटी बिन भई जग है सूना
फिर कहर क्यों बन जाती 
 
बेटी है गुणों की खान 
कोई कमी नहीं व्यवहार का
फिर भी बीतता कष्ट में जीवन
ताने सहते ससुराल का

शिक्षा को तुम ढाल बनाकर
खात्मा करो रूढ़ि संस्कार का
कड़वा घुट कल पड़े न पीना
हीन दासता अत्याचार का 
 
पैसे को भगवान समझ कर
करते अत्याचार जी 
इस दानव को मार भगाओ
है जन-जन का भार  जी

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मियों में आइस एप्पल खाने के फायदे, जानें क्यों कहलाता है सुपरफ्रूट

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

गर्मी के दिनों में फैशन में हैं यह कपड़े, आप भी ट्राय करना ना भूलें

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

कैंसर शरीर में कैसे फैलता है? जर्मन रिसर्च टीम ने किया नया खुलासा

सभी देखें

नवीनतम

सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!

23 मार्च शहीदी दिवस: इंकलाब के तीन सूरज: जब फांसी के फंदे भी चूम लिए गए

भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण जर्मन पुरस्कार से सम्मानित

चहक रहा है चूल्हा

परिंदे नहीं जानते कि उनकी मौत किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं होगी

अगला लेख