हिन्दी कविता : थाम हाथ मेरा...

डॉ. दीपा मनीष व्यास
चल आ यार 
थोड़ी बात कर लेते हैं
जो भी समस्या हो जीवन की
उसे सुलझा लेते हैं 
 
तो क्या हुआ गर हम
जीत नहीं पा रहे
चल उठ यार 
एक बार फिर कोशिश 
कर लेते हैं 
 
दुनिया लगी हुई है
पीछे करने को हमें
चल थाम हाथ मेरा
ये रास्ता पार कर लेते हैं
 
तू ले आ गर्म चाय
मैं लाता हूं बिस्कुट
और इस सख़्त ज़िंदगी को
थोड़ी सी नर्म कर लेते हैं
 
तुझे याद है वो चौराहा
वो चाट की दुकान
तो एक्स्ट्रा चटनी डाल
कुछ मसाले भर लेते हैं
चल थाम हाथ मेरा
ये रास्ता पार कर लेते हैं
 
जेब खाली है तो 
क्या हुआ यार
गले मे हाथ डाल
बाजारों की सैर कर लेते हैं
 
कल क्या होगा 
ये क्यों सोचे हम
उस कल को बनाने की
आज से शुरुआत 
कर देते हैं 
चल थाम हाथ मेरा
ये रास्ता पार कर लेते हैं
 
आ हम बैठते हैं 
कुछ पल साथ में
दिल के जज्बातों को
खोल लेते हैं 
कभी तू मेरे कंधे पर 
कभी मैं तेरे कंधे पर 
सिर रखकर थोड़ा 
रो लेते हैं  
चल आ यार
थोड़ी बात कर लेते हैं 
 
वो अल्हड़पन वो बेफिक्री से
दोस्ती गुलजार कर लेते हैं 
चल आ यार 
थोड़ी बात कर लेते हैं
चल थाम हाथ मेरा
ये रास्ता पार कर लेते हैं।

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