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मणिपुर घटना पर कविता : रहोगे तो तुम वहशी दरिंदे

निधि सक्सेना
चाहे तुम चांद पर पहुंच जाओ
या छू लो सूरज 
चाहे कविताएं लिख लो
या स्वयं को विद्वान कह लो
रहोगे तो तुम
वहशी दरिंदे
जो हैवानियत में अपनी मां बहन पत्नी दोस्त
सभी की बोटियां नोंच नोंच कर खा जाएगा
किसी को न छोड़ेगा
अपनी बेटी को भी नहीं
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