Festival Posters

वर्षा : एक शब्दचित्र

सुबोध श्रीवास्तव
गली के नुक्कड़ पे
बारिश की रिमझिम के बाद 
उस छोर से आती 
छोटी सी नदी में 
छपाक-छपाक करते 
अधनंगे बच्चे,
डगमगाकर आतीं 
कागज़ की छोटी-छोटी कश्तियां
पलभर को ताजा कर गईं
स्मृतियां
घर/बचपन की।
 
घर और बचपन
दोनों ही पर्यायवाची शब्द हैं
अस्थायित्व के
बचपन
हमेशा पास नहीं रहता
सरक जाता है घुटनों के बल
जाने कब?
 
और घर भी 
हमेशा 'घर' होने का एहसास
नहीं दिलाता 
हर किसी को।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मियों में आइस एप्पल खाने के फायदे, जानें क्यों कहलाता है सुपरफ्रूट

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

गर्मी के दिनों में फैशन में हैं यह कपड़े, आप भी ट्राय करना ना भूलें

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

कैंसर शरीर में कैसे फैलता है? जर्मन रिसर्च टीम ने किया नया खुलासा

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण जर्मन पुरस्कार से सम्मानित

चहक रहा है चूल्हा

परिंदे नहीं जानते कि उनकी मौत किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं होगी

नव संवत्सरः कृषि, जल और विकास के रोड मैप का संकल्प

चैत्र नवरात्रि, गुड़ीपड़वा और चेटीचंड पर्व पर बेहतरीन हिन्दी निबंध

अगला लेख