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भारत में इन शहरों की होली देखने विश्व भर से आते हैं बड़ी संख्या में पर्यटक, जानिए क्या हैं परम्पराएं

WD Feature Desk
बुधवार, 26 फ़रवरी 2025 (17:43 IST)
Holi 2025:  भारत में होली सिर्फ एक त्यौहार नहीं है बल्कि यह एक जज्बा है। होली एक ऐसा त्यौहार है जो सारी ऊंच-नीच और भेदभाव को मिटाकर एकता का संदेश देती है । इसीलिए हमारे देश में होली के त्यौहार के लिए एक अलग जोश और उमंग देखने को मिलता है।

वैसे तो होली का त्योहार पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। लेकिन यदि आप इस बार होली पर कुछ अलग और नया अनुभव करना चाहते हैं तो आज इस आलेख में हम आपको बताएंगे भारत के वह शहर जहां की होली विश्व प्रसिद्ध है।

लठमार होली
बरसाना और नंद गांव की होली लठमार की खास परंपरा के साथ पूरी दुनिया में अलग पहचान रखती है यहां की होली का इतिहास हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़ा है। मान्यता है कि जब श्री कृष्णा एक बार नंद गांव से अपने ग्वाल मित्रों के साथ होली पर बरसाना आए तो वे श्री राधा रानी और गोपियों के साथ होली खेलने और हंसी ठिठौली करने लगे। इससे तंग आकर राधा रानी और उनकी सखियां श्री कृष्णा और ग्वालो पर लट्ठ लेकर दौड़ी। तभी से बरसाने और नंद गांव में लठमार होली की परंपरा चली आ रही है।

लड्डू होली
लड्डू होली भी सिर्फ बरसाना में ही देखने को मिलती है। कहा जाता है कि एक  बार  जब राधा रानी अपनी सखियों के साथ नंदगांव में होली खेलने का निमंत्रण देने गईं थीं। तब नंदबाबा उनका निमंत्रण स्वीकार कर अपने पुरोहितों को वृषभानु जी के पास संदेश देने भेजा। वृषभानु जी ने पुरोहितों का सत्कार किया और उन्हें लड्डू खाने के लिए दिए, लेकिन गोपियों ने शर्त में पुरोहितों के गालों पर गुलाल मल दिया । उस समय पुरोहितों के पास लड्डू थे तो उन्होंने गोपियों पर लड्डू की बारिश कर दी और यहीं से लड्डूमार होली की परंपरा की शुरुआत हो गई। 

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हंपी की होली
अगर आप होली का त्योहार ऐतिहासिक धरोहरों के बीच मनाना चाहते हैं तो आपको हम्पी जाना चाहिए। हम्पी की होली में आप भक्ति और रंगों के साथ हमारी ऐतिहासिक विरासत का भी आनंद ले सकेंगे । यही खासियत हम्पी की होली को विशेष बनती है। होली के दौरान होने वाले लोक संगीत और नृत्य इस त्यौहार की मौज मस्ती में चांद चांद लगा देते हैं। यहां होली खेलने के बाद तुंगभद्र नदी में स्नान करने की परंपरा है, जो दक्षिण भारत की एक पवित्र नदी कही जाती है। हंपी की होली में भारत के अलावा विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

संगीत और बैठकी होली
अगर आपकी संगीत के शौकीन है तो आपके लिए कुमाऊं उत्तराखंड की बेड की होली बहुत अनुकूल है। यहां होली का त्योहार रंगो तक सीमित नहीं होता बल्कि उसमें शास्त्रीय संगीत और भक्ति के रस भी होते हैं। कुमाऊं की होली एक संगीतमय होली होती है। जो पारंपरिक रागों और गीतों से सजी होती है । यहां होली तीन प्रकार से मनाई जाती है। पहली होती है बैठकी होली, दूसरी खड़ी होली और तीसरी महिलाओं की होली।

शिग्मोत्सव का रंगारंग उत्सव
गोवा में होली का उत्सव 14 दिनों तक चलता है जिसे शिग्मोत्सव या शिग्मो के नाम से जाना जाता है। यहां होली पर हर छोटे बड़े गांव और शहर में ढोल और संगीत के साथ पारंपरिक लोक नृत्य का आयोजन किया जाता है। इस दौरान शहर में झांकियां लगाई जाती हैं और मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना होती है। गोवा की इस होली का पर्यटकों में बहुत आकर्षक होता है।



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