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इंदौर में HIV के बढ़ते आंकड़े : क्या नशे का ट्रेंड बन रहा है साइलेंट किलर, जानिए क्‍या है संक्रमण की वजह?

वेबदुनिया न्यूज डेस्क
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 (12:46 IST)
इंदौर, जिसे हम अपनी स्वच्छता और विकास के लिए जानते हैं, आज एक अदृश्य और घातक संकट की गिरफ्त में है। शहर में HIV संक्रमण की बढ़ती रफ्तार ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। ताज्जुब की बात यह है कि इस संक्रमण का सबसे बड़ा जरिया असुरक्षित संबंधों से कहीं ज्यादा 'नशे की सुई' भी माना जा रहा है।

एक तरफ चमकता इंदौर और दूसरी तरफ अंधेरी गलियों में दम तोड़ता भविष्य। शहर की चकाचौंध के पीछे सिर्फ नशा ही नहीं, अनसेफ और केजुअल सेक्‍स संबंध भी इंदौर में HIV का एक कारण बनता जा रहा है। जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो डराने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि HIV के बढते ग्राफ के पीछे असुरक्षित संबंध के साथ ही नशा भी हो सकता है।

एक साल में 519 HIV संक्रमित, 23 गर्भवती : इंदौर जिले की बता करें तो यहां HIV के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वर्ष 2025 में अक्टूबर तक 70 हजार 390 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 519 संक्रमित पाए गए थे। चिंता की बात यह है कि इनमें 23 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। 512 मरीजों का पंजीयन कर उपचार शुरू किया गया है। पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर जिले में हर साल 500 से 700 नए मरीज HIV संक्रमित मिल रहे हैं।

मां के साथ जुड़वा बच्चे HIV संक्रमित : हाल ही में इंदौर में IVF के जरिए मां बनने वाली एक महिला और उसके जुड़वा बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक महिला की पहले सिंगल टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई थी। समय रहते ट्रिपल टेस्ट होता तो संक्रमण का पता पहले चल सकता था और आवश्यक सावधानियां बरती जा सकती थीं, जिससे बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकता था।

क्‍या नशे की वजह से बढ़ रहा आंकड़ा : बता दें कि इंदौर में पिछले कुछ साल में नशे का चलन बढ़ा है। आए दिन ड्रग की खेप जब्‍त होने की खबरें सामने आती हैं। क्राइम ब्रांच ने पिछले कुछ सालों में करोडों रुपयों की ड्रग जब्‍त की है। इंदौर एजुकेशन हब भी है, यहां बडी संख्‍या में स्‍टूडेंट पढ़ने आते हैं। भंवरकुआं इलाके में यूनिवर्सिटी के आसपास से पुलिस ने कई बार ड्रग पेडलर्स को पकड़ा है। वेबदुनिया के सूत्र बताते हैं कई लोग समूह में नशा करते हैं, ऐसे में इंजेक्‍ट किए जाने वाले ड्रग को लेने के लिए वे एक ही निडल का इस्‍तेमाल करते हैं। ऐसे में एचआईवी के बढ़ते ग्राफ के पीछे एक यह भी वजह हो सकती है।

यह भी HIV संक्रमण की वजहें : विशेषज्ञ HIV के मरीजों की संख्‍या के पीछे कई तरह के कारण मानते हैं। डॉक्‍टरों का कहना है कि युवाओं में कैजुअल रिलेशन और अनसेफ इंटरकोर्स का चलन एक वजह हो सकता है। इसके साथ ही ड्रग इंजेक्शन लेना, मरीजों का नियमित रूप से उपचार नहीं लेना, नए डेटिंग चलन में अनजान पार्टनर के साथ डेट करना और फिर असुरक्षित संबंध बनाने का भी ट्रेंड है, ऐसे में यह भी एक वजह है। इसके साथ ही यदि रिश्‍ता बदलता है तो संक्रमण से बचने के लिए टेस्ट करवाना चाहिए। नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन के इस्‍तेमाल से बचना चाहिए। किसी भी सुई, ब्लेड, टैटू नीडल, पियर्सिंग नीडल को कभी शेयर न करें। बाहर विदेशों में ट्रेवल करने वाले और वहां असुरक्षित यौन संबंध बनाने वालों को जांच करवाना चाहिए।

अस्‍पतालों में क्‍यों नहीं हो रहा ट्रिपल टेस्ट : बता दें कि अधिकांश निजी अस्पताल एचआईवी के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अस्‍पतालों में सिंगल टेस्ट के आधार पर निगेटिव बताकर अंतिम रिपोर्ट दी जा रही है, जबकि ट्रिपल टेस्ट में वही लोग HIV पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य के जो नियम है उसके मुताबिक HIV संक्रमण की पुष्टि के लिए एक ही जांच काफी नहीं होती है। इसे जांचने के लिए पहले सिंगल टेस्ट किया जाता है, जिसमें एक किट या एक तरीके से जांच होती है। कई निजी अस्पताल इसी रिपोर्ट को अंतिम मान लेते हैं। डॉक्‍टरों का कहना है कि शुरुआती जांच में वायरस का पता नहीं चल पाता है, जिससे गलत रिपोर्ट आने की आशंका रहती है।

ट्रिपल टेस्ट है जरूरी : बता दें कि HIV की ठोस जांच और पुष्टि के लिए ट्रिपल टेस्ट जरूरी होता है। इस जांच में तीन अलग-अलग तरह की किट और तरीकों से जांच की जाती है। पहली जांच में रिएक्टिव आने पर दो दूसरे टेस्‍ट किए जाते हैं। तीनों रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने पर ही एचआइवी पाजिटिव बताया जाता है।

जिले में क्‍या है जांच की व्‍यवस्‍था : इंदौर जिले की 128 शासकीय और अशासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निश्शुल्क एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध है। जबकि 11 आईसीटीसी केंद्र और ग्रामीण क्षेत्रों के उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर भी जांच की व्यवस्था है। जिले में तीन डीएसआरसी और एसटीडी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

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