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Karva Chauth 2025: ये है करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि और मंत्र, नहीं तो अधूरा रह जाएगा आपका व्रत

WD Feature Desk
शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 (12:12 IST)
Karva chauth par chand ko arghya dene ki vidhi aur mantra: करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह पर्व जितना कठिन है, उतनी ही इसका फल भी महान है। इस व्रत का मुख्य आकर्षण और अंतिम चरण चंद्रमा को अर्घ्य देना है। हिंदू धर्म में चंद्र देव को मन, शीतलता और लंबी उम्र का कारक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जब तक सही विधि और उचित मंत्र के साथ चंद्रमा को जल (अर्घ्य) नहीं दिया जाता, तब तक व्रत पूर्ण नहीं माना जाता और इसका फल भी अधूरा रह जाता है। यह अर्घ्य मात्र जल चढ़ाना नहीं, बल्कि सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक है।

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय
व्रत के पूर्ण फल के लिए शुभ मुहूर्त का ज्ञान होना आवश्यक है।
आपके द्वारा दिए गए समय (दिल्ली के संदर्भ में) के अनुसार:
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: दिल्ली समय के अनुसार शाम 5 बजकर 57 मिनट पर प्रारंभ होगा, और यह मुहूर्त शाम को 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
करवा चौथ के दिन चंद्रमा के निकलने का समय (चंद्रोदय): दिल्ली समय के अनुसार रात 8 बजकर 13 मिनट है।
पूजा मुहूर्त में कथा और पूजन संपन्न करने के बाद, व्रती महिलाओं को चंद्रोदय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। ध्यान दें, चंद्रोदय का समय हर शहर में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि
करवा चौथ पर चंद्र देव को अर्घ्य देने की विधि को शास्त्रों में अत्यंत शुद्ध बताया गया है। इस विधि का पालन करना अनिवार्य है:
1. दिशा का चुनाव: पूजा करने और कथा सुनने के बाद, महिला को चंद्रोदय की दिशा में मुंह करके खड़े हो जाना चाहिए।
2. कलश की तैयारी: सबसे पहले एक कलश (लोटे) में शुद्ध जल भरें।
3. सामग्री का समावेश: कलश में केवल सादा जल ही नहीं, बल्कि चांदी का सिक्का और थोड़े से अक्षत (साबुत चावल) डालकर ही चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। यह सिक्का समृद्धि का और अक्षत शुद्धता का प्रतीक है।
4. दर्शन और अर्घ्य: छन्नी या जाली में दीपक रखकर पहले चंद्र देव का दर्शन करें। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलें। फिर, अर्घ्य देते समय जल की धार टूटने न दें और धीरे-धीरे जल चढ़ाएं।
5. अखंड सौभाग्य की प्रार्थना: अर्घ्य के बाद चंद्रमा से अपने पति की लंबी उम्र, रोग-मुक्त जीवन और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।

करवा चौथ मंत्र
करवा चौथ की पूजा में केवल चंद्र देव ही नहीं, बल्कि शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय का पूजन भी किया जाता है। चंद्र अर्घ्य देते समय या उससे पहले इन मंत्रों का जाप करने से व्रत का फल हजार गुना बढ़ जाता है।

पंचदेवों के मंत्र: विशेष रूप से, चंद्रमा को अर्घ्य देते समय व्रती महिला को मन ही मन 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का जाप निरंतर करते रहना चाहिए। यह मंत्र चंद्र देव को समर्पित है और शीघ्र फलदायी माना गया है।
करवा चौथ का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विधि-विधान, भक्ति और समर्पण का संगम है। सही मुहूर्त में, सही विधि से, और उचित मंत्रों के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही कोई भी व्रती महिला अपने व्रत का संपूर्ण और अक्षय फल प्राप्त कर सकती है। शुद्ध मन और श्रद्धा ही इस पर्व की वास्तविक शक्ति है।
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