Dharma Sangrah

सर्द मौसम पर कविता : मौसम ठिठुरा ठंड में

Webdunia
-  सुशील कुमार शर्मा
 
Winter Poem सूरज मद्दिम-सा हुआ, मौसम सिसकी लेय,
कुहरा नाचे मोर-सा, ठंड ठहाका देय।
 
मौसम ठिठुरा ठंड में, चला रजाई ओढ़,
सूरज अस्ताचल छुपा, ठंड पड़ी मुंहतोड़।
 
गरम पकौड़े तल रही, बीबी मन मुस्काय,
गरम जलेबी देखकर, मुख में पानी आय।
 
भीनी-भीनी धूप में, मन चंचल हो जाय,
प्यारी-प्यारी धूप जब, तन-मन को सहलाय।
 
मोती जैसी ओस है, चांदी जैसा नीर,
स्वप्न सुनहरे जम गए, हवा लगे शमशीर।
 
ठंड ठिठुरती रात में, जाड़ा दिन में रोय,
कुहरा बैठा ताक में, शाम ठिठुरती सोय।
 
हवा लगे शमशीर-सी, नीर लगे तन रोय,
बाथरूम बैरी लगे, कैसे तन को धोय।
 
मोजे-स्वेटर पहनकर ढंके, मुंदे सब लोग,
उछल-कूद बच्चे करे, खाकर छप्पन भोग।
 
जाड़े के दिन सुखद हैं, मन प्रसन्न मुस्काय,
मन इच्छित भोजन करो, शुभ यात्रा पर जाय।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या आपका फर्स्ट वेलेंटाइन डे है, तो ऐसे करें Valentine Week को सेलिब्रेट

Kiss Day 2026: प्यार जताने के सही मायने और जरूरी सीमाएं

Hug Day 2026: गले लगाने का सही तरीका और ये बड़ी गलतियां न करें

वेलेंटाइन डे पर प्रेरक प्रेम कविता: प्रेम का संकल्प

Valentine Day Essay: वेलेंटाइन डे पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

सभी देखें

नवीनतम

Maha Shivratri Recipes: महाशिवरात्रि व्रत विशेष 5 फलाहार रेसिपीज

महाशिवरात्रि पर भांग क्यों पी जाती है? जानिए धार्मिक कारण और नशा उतारने के आसान उपाय

महाशिवरात्रि पर किस तरह बनाएं ठंडाई, जानिए विधि Maha Shivratri Thandai

Maha Shivratri Nibandh: महाशिवरात्रि पर हिन्दी निबंध

Valentine Special: राशि से जानें आपका कौन-सा है बेस्ट लव मैच

अगला लेख