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चटपटी बाल कविता : जंगल की होली

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
सोमवार, 10 मार्च 2025 (13:54 IST)
शेर भाई ने हाथी जी के,
माथे में था तिलक लगाया।
 
हाथी ने भी सूंड उठाकर,
ढेरम ढेर ग़ुलाल उड़ाया।
 
तभी हाथ में ले पिचकारी,
एक गिलहरी थी आ धमकी।
 
बंदर ढ़ोल बजता आया।
कौआ लगा बजाने टिमकी।
 
सबने होली खूब मनाई,
हो हल्ला था खूब मचाया।
 
एक लोमड़ी ने सबको ही,
हलवा गरमागरम खिलाया।
 
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